जोधपुर. जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय से संबद्ध एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज के स्वतंत्र होकर विश्वविद्यालय बनने के बाद व्यास विश्वविद्यालय ने अपनी खराब माली हालत को देखते हुए अब राज्य सरकार को पेंशन का भार अपने ऊपर लेने का आग्रह करेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन शीघ्र ही एक पत्र के जरिए सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट कर देगा। विश्वविद्यालय की सालाना आय करीब 110 करोड रुपए हैं जिसमें से 35 करोड़ एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज के खाते से आते हैं। विश्वविद्यालय में करीब 1500 पेंशनर है जिनकी हर महीने करीब 7 करोड रुपए पेंशन बनती है। एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज के व्यास विश्वविद्यालय का भाग नहीं रहने पर विश्वविद्यालय अपने कर्मचारियों को पेंशन देने में असमर्थ रहेगा। गौरतलब है कि कोविड-19 काल में 30 साल में पहली बार विश्वविद्यालय के पेंशनर्स को पेंशन के लिए विरोध प्रदर्शन और धरना देना पड़ा था।
लगातार दूसरा विवि, जहां एक से दो विवि बने
जेएनवीयू के कुलपति प्रो प्रवीण चंद्र त्रिवेदी इससे पहले गोरखपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के 2011 से 2014 तक कुलपति रहे। यह संयोग ही है कि उनके कुलपति कार्यकाल के दौरान गोरखपुर विश्वविद्यालय भी बड़ा होने के कारण दो हिस्सों में विभक्त हो गया। उत्तर प्रदेश सरकार ने उससे अलग कर सिद्धार्थ नगर विश्वविद्यालय बनाया। अब यहां व्यास विश्वविद्यालय से एमबीएम विश्वविद्यालय बनने जा रहा है।
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‘एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज के विवि बनने के बाद पेंशन देना हमारे बस की बात नहीं रहेगी। हम राज्य सरकार को पेंशन का भार अपने ऊपर लेने के लिए जल्द ही सूचित करेंगे।’
-प्रो प्रवीण चंद्र त्रिवेदी, कुलपति, जेएनवीयू
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