कुपोषण समाप्त करने में मोटे अनाजों पर लगी अन्तरराष्ट्रीय मुहर

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जोधपुर।

विश्व की बढ़ती हुई जनसंख्या को पौष्टिक खाद्यान्न की उपलब्धता कृषि वैज्ञानिकों के लिए एक चुनौती बनी हुई है। एेसे में मोटे अनाजों में विद्यमान पोषक तत्वों की कुपोषण समाप्त करने में मुख्य भूमिका सामने आई है, जिसको अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है। इस कारण संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएन) ने वर्ष २०२३ को इंटरनेशनल ईयर ऑफ द मिलेट्स (मोटे अनाजों का वर्ष) घोषित किया है। इन मोटे अनाजों में बाजरा, ज्वार, मक्का, रागी, कांगनी चीना, जौ, मक्का आदि अनाज शामिल है। भारत इन मोटे अनाजों का प्रमुख उत्पादक देश है, इन मोटे अनाजों में पोषक तत्वों के कारण संयुक्त राष्ट्र संघ ने २०२३ को मोटे अनाजों का वर्ष घोषित किया है, ताकि दुनिया में बढ़ रहे कुपोषण के खात्मे में अन्य देश भी मोटे अनाजों की खेती के प्रति आकर्षित हो।

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जोधपुर में मोटे अनाजों पर हो रहा शोध

जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय पारम्परिक रूप से खाए जाने वाले मोटे अनाजों पर शोध कर रहा है, जिनमें वर्तमान में प्रचुरता में खाए जाने वाले गेहूं-धान-चावल से अधिक पौष्टिकता पाई गई है। विश्वविद्यालय में बाजरा की तो नई किस्म भी विकसित की गई, जिसके अच्छे परिणाम आए है। इसके अलावा विश्वविद्यालय में रागी (मडुंआ), कांगनी, चीना, कोडूमिलेट, लघु धान आदि मोटे अनाजों की विभिन्न किस्मों पर शोध किया गया ।

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देश में सबसे ज्यादा बाजरा उत्पादन राजस्थान में

मोटे अनाजों में प्रमुख बाजरा है। बाजरा क्षेत्रफल व उत्पादन की दृष्टि से राजस्थान देश में पहले नम्बर पर है। देश में कुल 9.8 मिलिनय हैक्टेयर क्षेत्रफल में बाजरा बोया जाता है। जिसका उत्पादन करीब 9.4 मिलियन टन है। इसमें अकेले पश्चिमी राजस्थान में करीब 3.75 मिलियन टन उत्पादन होता है, जो देश का करीब 42 प्रतिशत हिस्सा है। राजस्थान में करीब 4.15 मिलियन हैक्टेयर में बाजरा बोया जाता है, जो पूरे देश का करीब 56 प्रतिशत क्षेत्रफल में है।

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मोटे अनाज में पौष्टिकता की भरमार

बाजरा की एमपीएमएच-17 किस्म

- इस किस्म में आयरन व जिंक तत्वों की भरमार, जो कुपोषण खत्म करने में कारगर।

- इसमें देशी बाजरी के सभी गुण विद्यमान।

- पश्चिमी राजस्थान के सूखाग्रस्त क्षेत्रों में ज्यादा उत्पादन देने में सक्षम।

- किस्म के दोनों पैतृकों (नर व मादा) में अधिक तापमान सहन करने की शक्ति

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रागी (मडुंआ)

- उच्च पोषण वाला मोटा अनाज आयरन 3.9 मिग्रा प्रति 100 ग्राम होता है।

- कैल्सियम 344 मिग्रा प्रति 100 होता है।

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कांगनी

- आयरन के साथ फाइबरयुक्त व प्रोटीन का स्त्रोत।

- मधुमेह रोगियों के लिए फायदेमंद, इम्यूनिटी बढ़ाता है।

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चीना

- ब्लडशुगर लेवल को नियंत्रित करती है।

- आयरन-फाइबर का स्त्रोत होने के कारण कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है।

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मोटे अनाजों में पौष्टिक तत्वों की भरमार होती है। इस कारण इन मिलेट्स को अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। भारत मोटे अनाजों का प्रमुख उत्पादक देश है। राजस्थान भी मोटे अनाजों के उत्पादन में समृद्ध है।

प्रो बीआर चौधरी, कुलपति

कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर



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