जोधपुर. आत्महत्याएं करने वालों की कोई उम्र नहीं होती। ये एक आवेश है, जो कभी भी आ सकता है। मनोचिकित्सकों के अनुसार इन मौतों को रोका जा सकता है। इसमें बात करना इसलिए जरूरी हैं कि दुनिया में हर सौ में से एक मौत का कारण आत्महत्या सामने आ रहा है। तकरीबन दुनिया में 7-8 लाख मौतें हर साल आत्महत्या से होती हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार साल 2019 में 1 लाख 39 आत्महत्याएं हुई। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस विश्व भर में 10 सितंबर को मनाया जाता है। इस बार विश्व स्वास्थ्य संगठन ने थीम ' कार्य करके उम्मीद जगानाÓ रखी है। परेशान व्यक्ति को मात्र सुनने से उसके आत्महत्या के प्लान को टाला जा सकता है। डॉक्टरों के अनुसार आत्महत्या करने वाले व्यक्ति सोचते भी हैं, उन्हें ऐसा करना चाहिए या नहीं। आखिर आवेश में आकर वे खुद की जान ले बैठते हैं।
मोटिवेशनल टॉक सुने औरों को सुनाएं
एम्स मनोचिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. नरेश नेभिनानी ने बताया कि शोधों में सामने आया कि दुखी और हताश व्यक्ति मोटिवेशनल टॉक सुने औरों को सुनाएं, इससे काफी हद तक मनोस्थिति सुधरती है। गलत व आत्महत्या जैसे ख्याल दिल से निकालने में मदद मिलती है। आत्महत्या के कारणों को जानकर भी लोग आत्महत्या करते हैं। दुखी मन होने पर म्यूजिक व कॉमेडी वीडियो भी देखे। रिसर्च में सामने आया कि इनसे भी फायदा मिलता है।
आत्महत्या करने वाले 60 प्रतिशत बीमार
डॉ. नेभिनानी के अनुसार आत्महत्या करने वाले 60 प्रतिशत लोग बीमार होते हैं। इन्हें मानसिक बीमारी और अवसाद होता है। इनमें से ज्यादातर लोग ट्रीटमेंट नहीं ले रहे होते , कइयों ने ट्रीटमेंट शुरू किया, लेकिन मरने से कुछ दिन पूर्व दवाइयां लेना बंद कर दिया था।
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