जोधपुर. लुधियाना की फैक्ट्री में काम करने वाले एक व्यक्ति ने पिछले एक साल में 80 से अधिक भारतीय नंबरों के वाट्सएप के ओटीपी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) को भेज दिए। इससे पाकिस्तान इंटेलिजेंस ऑपरेटिव (पीआईओ) देश में कई वाट्सएप ग्रुप के एडमिन बनकर सूचनाएं चुरा रहे हैं। ऐसे ही एक पीआईओ के बार-बार पूछताछ करने पर जोधपुर की एयरफोर्स इंटेलिजेंस ने खोजबीन शुरू की। इसके बाद ओटीपी भेजने की एवज में रुपए हासिल करने वाले फैक्ट्री श्रमिक जसविंदर सिंह को रविवार रात दबोचा गया। वह पाक की महिला आईएसआई एजेंट के हनीट्रैप में फंस गया था। यह हनीट्रैप दो दिन पहले जयपुर में रेल डाक सेवा कर्मचारी के फंसने जैसा ही था। आईएसआई की महिला एजेंट ने जसविंदर को भी स्वयं के पोर्ट ब्लेयर में होने और मेडिकल स्टूडेंट होने की बात बताई थी।
सिविलियन स्टाफ की सतर्कता से खुला मामला
एयरफोर्स में कार्यरत सिविलियन ने म्यूच्यूअल पोस्टिंग ग्रुप बना रखे हैं। इसमें एक दूसरे की जरूरत के अनुसार कहीं पर पद खाली होने और उसके अनुसार वहां एक-दूसरे को स्थानांतरण करवाने की सूचना का आदान-प्रदान होता है। ऐसे ही एक ग्रुप में जोधपुर से एयरफोर्स का सिविलियन स्टाफ भी जुड़ा हुआ था। कुछ दिन पहले एक अनजान नंबर से बार-बार स्थानांतरण करवाने के मैसेज आए। एयरफोर्सकर्मी ने नंबर ब्लॉक कर दिया तो उसने वाट्सएप कॉल किया। एयरफोर्स कर्मी ने इसकी सूचना इंटेलिजेंस को दी। तब जोधपुर एयरपोर्ट इंटेलिजेंस ने जांचकर मामले का भंडाफोड़ किया।
पीआईओ को ग्रुप एडमिन देखकर हैरान
जांच में पता चला कि कई भारतीय मोबाइल नंबर पाकिस्तान में बैठे आईएसआई के एजेंट यानी पीआईओ ऑपरेट कर रहे हैं। वे कई भारतीयों के वाट्सएप ग्रुप में एडमिन भी बने हुए हैं। सेना से संबंधित जानकारी डालने या किसी की ओर से सामरिक सूचना साझा करने पर वह उस व्यक्ति को टारगेट कर फांसने का प्रयास करते हैं। यह देख सेना के अधिकारी भी हैरान रह गए। जसविंदर से इसे लेकर संयुक्त पूछताछ की जा रही है।
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