जोधपुर।
कोविड-19 महामारी के कारण जीरा निर्यात प्रभावित हुआ है। जोधपुर सहित पश्चिमी राजस्थान की रबी सीजन की मुख्य मसाला फ सल जीरा उत्पादक किसानों के सामने निर्यात प्रभावित होने से गत वर्ष के 17 हजार क्ंिवटल से नीचे आकर 12 हजार क्ंिवटल हो गए है। ऐसे में किसान लागत से कम दाम के कारण आशंकित है। वितरण चैन टूटने व निर्यात प्रभावित होने से जीरे के भावों में आई कमी से किसानों में निराशा है। ऐसे में जीरे का समर्थन मूल्य तय कर सरकारी खरीद की मांग उठने लगी है।
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समर्थन मूल्य घोषित करने की मांग
भारतीय किसान संघ ने कृषि मूल्य व लागत आयोग (सीएसीपी) से जीरे का समर्थन मूल्य घोषित करने की मांग की है। वहीं वाणिज्य व कृषि मंत्री को भी पत्र लिखकर जीरा निर्यात प्रोत्साहन योजना की अवधि बढ़ाने का भी अनुरोध किया गया। संगठन की ओर से सीएसीपी प्रमुख को लिखे पत्र में बताया कि शुष्क जलवायु व कम सिंचाई में उत्पादित होने के कारण राजस्थान के किसानों का रुझान इस प्रमुख मसाला फ सल की ओर गया है। इससे प्रदेश बुवाई के मामले में देश मे पहले स्थान पर है, वहीं उत्पादन की दृष्टि से गुजरात के बाद राजस्थान दूसरे स्थान पर आता है। प्रदेश में लगभग 6 लाख हैक्टेयर में जीरे की बुवाई होती है तथा 4 लाख मिट्रिक टन से ज्यादा का उत्पादन होता है।
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जीरा बुवाई रकबा रबी 2020-21 (रकबा हैक्टेयर में)
जिला -- बुवाई रकबा
बाड़मेर -- 2.15000
जोधपुर -- 1.87000
जालौर -- 90000
जैसलमेर -- 60000
नागौर -- 50000
सिरोही --- 15000
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कुल 607000
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जीरा निर्यात (मात्रा मिट्रिक टन )
वर्ष -- मात्रा
2015-16 -- 97790
2016-17 -- 119000
2017-18 -- 143670
2018-19 -- 180300
2019-20 -- 210000 (अनुमानित)
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जीरे की लागत ही 14 हजार प्रति क्ंिवटल से अधिक आती है लेकिन बाजार भाव गत सीजन से ही 12-13 हजार प्रति क्विंटल से नीचे है। सरकार जीरे का समर्थन मूल्य तय कर खरीद करें व जीरे के निर्यात प्रोत्साहन के लिए प्रयास करें ताकि किसानों को नुकसान से बचाया जा सके।
रामनारायण जांगू, भारतीय किसान संघ
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