जोधपुर. राज्य सरकार भर्तियों की घोषणा तो कर देती हैं, लेकिन समय पर इन्हें पूरा नहीं कर पाती। इसका ताजा उदाहरण हैं कि साल 2019 में घोषित 480 दंत चिकित्सकों की भर्ती। इस भर्ती के लिए साल 2019 में सरकार ने बजट घोषणा तक की थी। इस भर्ती का इंतजार प्रदेश के 6 हजार रजिस्टर्ड डॉक्टर कर रहे हैं। प्रदेश में 1 सरकारी दंत महाविद्यालय समेत 13 दंत महाविद्यालय हैं। हर वर्ष यहां से 2 हजार दंत चिकित्सक पास होकर निकलते हैं। जो भर्तियों में चल रही उपेक्षित नीति के चलते बेरोजगारी का दंश झेल रहे हैं।
लगभग 3 सौ पद चल रहे रिक्त
प्रदेश में 24 सौ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं और 650 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैंं। यहां लगभग 3 सौ दंत चिकित्सकों के सामुदायिक स्वास्थ्य पर पद रिक्त हैं। जिला व सैटेलाइट अस्पतालों में तो दंत स्नात्तकोत्तर के पद तक सृजित नहीं किए हुए हैं।
कैंसर की पहचान में मुख्य कड़ी
देश में ब्रेस्ट के साथ सबसे कॉमन मुख कैंसर है। कई मुख कैंसर मरीज भी सर्वप्रथम दंत चिकित्सकों के पास ही जाते हैं। हर दिन लगभग 35 सौ लोग मुख कैंसर से पीडि़त होते हैं। दंत चिकित्सक सहायक सिविल सर्जन के रूप में योग्यता रखते हैं।
इनका कहना हैं...
राज्य सरकार ने भर्ती घोषणा तो कर दीं, लेकिन उसके बावजूद अभी तक कुछ नहीं हुआ। गांव-दूरदराज ढाणी में बैठे लोगों को दंत सेवाओं का लाभ तक नहीं मिल रहा है। हमने कई बार राज्य सरकार को अवगत कराया, उसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। समय रहते सरकार ने मांगें नहीं मानी तो आंदोलन करेंगे। उसके बावजूद कुछ नहीं हुआ तो महाविद्यालयों को बंद कराया जाएगा और सरकारी दंत महाविद्यालयों पर धरना दिया जाएगा। जेल भरो आंदोलन प्रक्रिया चलाई जाएगी।
- डॉ. संदीप मीणा, अखिल राजस्थान दंत चिकित्सक संगठन के प्रमुख
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