ईसरदास जनमानस के महान संत थे- डॉ प्रकाश अमरावत

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जोधपुर. जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के राजस्थानी विभाग की ओर से आयोजित ऑनलाइन व्याख्यानमाला के तहत भक्त कवि ईसरदास पर डॉ प्रकाश अमरावत ने व्याख्यान दिया।
डॉ अमरावत ने कहा कि राजस्थानी साहित्य में भक्त कवि ईसरदास जी का नाम जनमानस में बड़ी श्रद्धा और आस्था से लिया जाता है। ईसरदास ने आम जनता में सरल सहज और लोक शब्दावली में अपने लेखन से ख्याति प्राप्त की। भक्तिकाल के अनेकों राजस्थानी कवियों में भक्त कवि ईसरदास एक ऐसे कवि थे जिन्होंने जन चेतना और सामाजिक चेतना जगाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके साहित्य में भक्ति के साथ वीर रस की उच्च कोटि की रचनाएं मिलती है। उनकी रचनाओं में हरि रस, हांळा झांळा रा कुण्डलिया, बाल लीला, देवीयाण, गुरूड पुराण, गुण आगम, निंदा स्तुति आदि बहुत ही प्रसिद्ध रचनाएं है। डॉ अमरावत ने बताया कि कवि ईसरदास जी ने आम जनता में भक्त के महा रस को सहजता और निर्भिकता के साथ आम जनता मे ंसमाहित किया। ईसरदास जी ने धार्मिक सांस्कृतिक, अध्यात्मिक धरातल पर जो साहित्य रस उसका मुख्य आधार धरती था। कवि ने देवीयाण रचना के माध्यम से मातृशक्ति को कण कण में विध्यमान कर दिया।
राजस्थानी विभागाध्यक्ष डॉ. मीनाक्षी बोराणा ने बताया कि व्याख्यानमाला में डॉ. गजेसिंह राजपुरोहित, डॉ धनंजया अमरावत, भंवरलाल सुथार, रामरतन लटिया, संतोष चौधरी, विष्णुषंकर, नमामी शंकर आचार्य, तरूण जी, गोपालसिंह छत्रमल छाजेड सहित बड़ी संख्या में श्रोता जुडे रहे।



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