जोधपुर। प्रदेश में स्कूली खेलों के स्तर सुधारने के लिए सरकार के दावे-प्रयास खोखले साबित हो रहे हैं। यह विडम्बना है कि अब राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताएं भामाशाहों के भरोसे होगी। स्कूल गेम्स फैडरेशन ऑफ इंडिया (एसजीएफआई) की ओर से सत्र २०२१-२२ के लिए राष्ट्रीय विद्यालयी १७/१९ आयु वर्ग की प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए एसजीएफआई ने देश के सभी राज्यों के साथ राजस्थान को भी राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के आयोजन/मेजबानी के लिए पत्र लिखकर सूचित किया है। इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने प्रतियोगिताओं के आयोजन की मेजबानी करने की इच्छुक विद्यालयों व संस्था प्रधानों को २८ जुलाई तक सहमति पत्र निदेशालय भेजने के निर्देश दिए है। साथ ही, उपनिदेशक माध्यमिक शिक्षा विभाग खेलकूद ने स्पष्ट किया है कि प्रतियोगिता का समस्त आर्थिक व्ययभार जनसहयोग, भामाशाहों, प्रायोजकों व दानदाताओं की ओर से देय संग्रहित राशि में वहन किया जाएगा। विभाग की आेर से राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए किसी तरह का बजट आवंटन नहीं किया जाएगा प्रतियोगिता आयोजन के संबंध में कार्य योजना का प्रारूप निदेशालय को सात दिनों में भेजने के निर्देश दिए गए है।
राज्य आयोजनों के लिए ५० हजार, राष्ट्रीय आयोजन के लिए कुछ नही
यह खेलों के लिए विडम्बना ही है कि शिक्षा विभाग की ओर से राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं के लिए तो ५० हजार रुपए आयोजक विद्यालय को दिए जाते है जबकि राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए आयोजक विद्यालय को एक रुपया भी नहीं दिया जाता है। आयोजकों को भामाशाहों के भरोसे ही प्रतियोगिता का आयोजन करवाना पड़ता है।
राष्ट्रीय आयोजन होंगे तो खेलों का होगा विकास
राज्य में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता का आयोजन अधिकाधिक होगा तो खेलों का विकास भी होगा। स्कूली खेल विशेषज्ञों के अनुसार, राज्य में स्कूली खेलों के विकास के लिए आवश्यक है कि राज्य सरकार राज्य व राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए शिक्षा विभाग को पर्याप्त खेल बजट आवंटित करे ताकि शिक्षा विभाग में आयोजित होने वाली तीनों आयु वर्ग की प्रतियोगिताओं का आयोजन सफल तरीके से कराया जा सके।
केन्द्र की गाइडलाइन है
राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं के लिए आयोजक विद्यालय को ५० हजार रुपए देते है। राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिता के लिए एसजीएफआई के गाइडलाइन के अनुसार भामाशाहों-दानदाताओं के सहयोग से कराया जाना है।
पीतराम सिंह, उप निदेशक (खेलकूद)
माध्यमिक शिक्षा विभाग बीकानेर
शर्म की बात
राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं भामाशाहों-दानदाताओं के भरोसे कराना विभाग नहीं बल्कि प्रदेश के लिए शर्म की बात है। राष्ट्रीय स्तरीय विद्यालयी खेलकूद प्रतियोगिताओं के राज्य में आयोजन के लिए सरकार शिक्षा विभाग को बजट आवंटित करे ताकि प्रतियोगिताओं का आयोजन हो सके। दूसरे राज्यों की तरह राजस्थान में आयोजन का व्यय सरकार को वहन करना चाहिए।
हापूराम चौधरी, प्रदेशाध्यक्ष
राजस्थान शारीरिक शिक्षा शिक्षक संघ
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/3iU9OtQ
0 comments:
Post a Comment