जोधपुर. भारतीय सेना की कोणार्क कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) लेफ्टिनेंट जनरल पीएस मन्हास ने कहा कि भारत-पाकिस्तान के मध्य 1971 में हुई जंग आखिरी नहीं थी। दुश्मन अब नए फॉर्म और नए तरीकों में सामने आ रहा है लेकिन जब तक भारतीय फौज है, देशवासियों को चिंता करने की जरुरत नहीं है। देश की अखण्डता को कभी आंच नहीं आने देंगे।
जोधपुर मिलिट्री स्टेशन स्थित कोणार्क युद्ध स्मारक पर स्वर्णिम विजय मशाल के लिए आयोजित सम्मान समारोह के संबोधन और पत्रकारों से बातचीत करते हुए ले. जनरल मन्हास ने कहा कि वे गांधी जी के देश में रहते हैं और सेना भी अहिंसा में विश्वास रखती है। अगर किसी के इरादे नेक नहीं होंगे तो उसे मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
गौरतलब है कि भारत-पाक के मध्य 1971 में हुए युद्ध के दौरान मुख्य मोर्चा पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान में बांग्लादेश) में था लेकिन पश्चिमी सीमा पर भी भारतीय सेना पाकिस्तान से लड़ी। राजस्थान और गुजरात की पाकिस्तान से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा जोधपुर स्थित कोणार्क कोर के अधीन आती है।
मैं भी मेजर चांदपुरी के गांव का
वर्ष 1971 की लड़ाई में जैसलमेर स्थित लोंगेवाला की लड़ाई प्रसिद्ध है जिस पर प्रसिद्ध फिल्म बॉर्डर बनी है। लोंगेवाला में तत्कालीन मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी के नेतृत्व में केवल सेना की एक कंपनी ने पाकिस्तानी टैंक ब्रिगेड को धूल चटा दी थी। समारोह को मंच से संबोधित करते हुए ले. जनरल मन्हास ने गर्व से कहा कि वे भी चांदपुरी के गांव के हैं। संस्मरण सुनाते हुए उन्होंने बताया कि जब युद्ध समाप्त होकर चांदपुरी गांव आए तब गुरुद्वारे में उनकी जीत का जश्न मनाया गया। उन्होंने भी जीत की खुशी में चार-पांच लड्डू खाए थे। उस समय मन्हास 7 साल के थे। लेफ्टिनेंट जनरल ने गर्व से कहा कि अब वे उस कोर को कमान कर रहे हैं।
ब्रिगेडियर चांदपुरी की पत्नी आएगी लोंगेवाला
लेफ्टिनेंट जनरल मन्हास ने बताया कि जोधपुर से स्वर्णिम विजय मशाल जैसलमेर जाएगी, जहां लोंगेवाला में ब्रिग्रेडियर (तत्कालीन मेजर) कुलदीप सिंह चांदपुरी की पत्नी उस मशाल को रिसीव करेगी।
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