राज्यसभा सांसद ने लिफ्ट केनाल में ‘प्रदूषित पानी’ को लेकर खोला मोर्चा

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जोधपुर। इंदिरा गांधी नहर और उसके बाद जोधपुर आने वाली राजीव गांधी लिफ्ट केनाल में प्रदूषित पानी का आरोप लगाते हुए भाजपा ने मोर्चा खोल दिया है। राज्यसभा सांसद राजेन्द्र गहलोत दो दिन पहले केनाल का निरीक्षण करने गए थे। उन्होंने सोमवार को प्रेसवार्ता में साथ लाए पानी के सैम्पल दिखाए और कहा कि तीन स्तर पर सैम्पलिंग होनी चाहिए। इस मुद्दे पर पीएचइडी के मुख्य अभियंता (प्रोजेक्ट) नीरज माथुर ने बताया कि यहां पानी की नियमित सैम्पलिंग होती है। पानी में कोई दोष सामने नहीं आया है।

सांसद के आरोप और मुख्य अभियंता के जवाब
सांसद - पंजाब से प्रदूषित पानी छोड़ा जा रहा है। दस जिले प्रभावित होते हैं तो पश्चिमी राजस्थान में कैंसर फैलने का खतरा है। जोधपुर में केनाल के उद्गम स्थल, इसके बाद अंतिम पम्प हाउस और फिर तख्तसागर-कायलाना में अलग-अलग सैम्पलिंग होनी चाहिए। पंजाब सरकार पर दबाव बनाया जाए कि वह प्रदूषित पानी रोके। बोतल में लाए सैम्पल की हम खुद जांच करवाएंगे।

मुख्य अभियंता - जोधपुर में नहरबंदी के बाद पहली बार पानी आया तो मैंने ही पूजा कर स्वागत किया, तब भी प्रदूषित पानी नहीं था। अभी तो हम पूरी केनाल में टेस्टिंग कर रहे हैं। हर पांच घंटे में टेस्टिंग हो रही है। कोई खतरनाक तत्व नहीं मिला है। मैं और मेरा परिवार भी यही पानी पी रहा है। फलोदी से या जोधपुर का कोई भी पानी हो, उसकी कहीं भी जांच करवाई जा सकती है।

यह भी रखी सांसद ने मांगें
- हरिके बैराज में छोड़ा गया पानी काफी दूषित है। पंजाब की औद्योगिक इकाइयों का केमिकल युक्त पानी और सीवरेज का गंदा पानी मिलने से पानी जहरीला हो रहा है। पंजाब में प्रवेश से पहले सतलुज नदी का पानी ‘बी’ श्रेणी का होता है जो दूषित होते हुए भी पीने योग्य है, लेकिन पंजाब में प्रवेश के बाद केमिकल युक्त और सीवरेज का पानी मिलने से यह ‘ई’ श्रेणी का हो जाता है, जो पीने के लिए अनुपयोगी होने के साथ स्वास्थ्य के लिए भी काफी हानिकारक है। राजनीतिक दूरदर्शिता के चलते इस मामले में पूरी तरह उदासीन राज्य सरकार पंजाब पर उचित दबाव नहीं बना पा रही है।

मुद्दा इसलिए भी...
नहरबंदी के बाद श्रीगंगानर व हनुमानगढ़ के कुछ क्षेत्रों में प्रदूषित पानी आया था। इससे प्रदेश के सभी १० जिले जहां नहर का पानी जाता है, वहां अलर्ट जारी हुआ। ७५ सौ गांवों पर खतरा मंडराया। प्रदूषित पानी के कारण पहले भी पंजाब सरकार पर एनजीटी ५० करोड़ का जुर्माना लगा चुकी है, लेकिन बीकानेर के आगे प्रदूषित पानी की सरकारी स्तर पर पुष्टि नहीं हुई है। अब यदि स्वतंत्र जांच होती है तो उसमें भी खुलासा हो जाएगा।



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