जोधपुर. पश्चिमी सीमा से लगते बॉर्डर तक ट्रेन के जरिए हथियार, गोला-बारूद सहित अन्य मिलिट्री उपकरण तेजी से पहुंचाने के उद्देश्य से दो दिन पहले आर्मी ने वेस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डब्ल्यूडीएफसी) पर मिलिट्री ट्रेन का ट्रायल किया। सामान्य रेलवे ट्रेक की तुलना में इस ट्रेक पर मिलिट्री ट्रेन दोगुनी रफ्तार से दौड़ी। सेना ने ट्रायल को सफल बताया। डब्ल्यूडीएफसी से भविष्य में पाकिस्तान से लगते बॉर्डर तक सैन्य सामान और सैनिकों की आवाजाही तेजी से हो सकेगी
भारतीय रेलवे और डेडिकेटेड फ्रेट कोरिडोर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के सहयोग से आर्मी ने हरियाणा के न्यू रेवाड़ी से राजस्थान के न्यू फुलेरा तक मिलिट्री ट्रेन का ट्रायल किया। ट्रेन पर टी-90 टैंक, दक्षिण कोरियाई के-9वज्र 155एमएम होविज्जर तोप, बख्तरबंद मरम्मत व्हीकल, ऑफ रोड ट्रक और कई सैनिक सवार थे। रेलवे के सामान्य ट्रेक पर मिलिट्री ट्रेन औसतन 35 से 40 किलोमीटर की रफ्तार पर चलती है, जबकि डब्ल्यूडीएफसी पर औसत 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर चली। वर्तमान में एक स्थान से दूसरे स्थान पर सैन्य सामान और सैनिकों की आवाजाही में कई घंटे से लेकर दिन लग जाते हैं। डब्ल्यूडीएफसी से राजस्थान से कोलकाता सामान 24 घण्टे में भेजा सकेगा। डब्ल्यूडीएफसी में कोई स्टोपेज नहीं हैं, जबकि सामान्य ट्रेक पर मालगाड़ी को हर 150 किलोमीटर पर रुकना पड़ता है।
रेवाड़ी से पालनपुर ऑपरेशनल हुआ
डब्ल्यूडीएफसी दिल्ली के पास स्थित उत्तर प्रदेश के दादरी से शुरू होकर मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट तक है। इसकी लंबाई 1504 किलोमीटर है। सर्वाधिक लंबा ट्रेक राजस्थान में 567 किलोमीटर गुजरता है। इसका निर्माण पांच चरण दादरी से न्यू रेवाड़ी, न्यू रेवाड़ी से इकबालगढ़ (पालनपुर), पालनपुर से वडोदरा, वडोदरा से सचिन और सचिन से जवाहरलाल नेहरू पोर्ट तक किया जा रहा है। वर्तमान में केवल न्यू रेवाड़ी-पालनपुर चरण ही ऑपरेशन हुआ है।
मारवाड़ जंक्शन तक तेजी से आएगी ट्रेन
न्यू रेवाड़ी-इनबाललगढ़ (पालनपुर) ट्रेक हरियाणा से राजस्थान में जयपुर में न्यू फुलेरा से होते हुए अजमेर और मारवाड़ जंक्शन तक आएगा। इस ट्रेक की लंबाई 641 किलोमीटर है। फ्रेट कॉरिडोर के साथ रेलवे के अन्य ट्रेक भी कनेक्ट होंगे जिससे सामान कहीं भी तेजी से पहुंच सकेगा।
स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना का हिस्सा
केंद्र सरकार देश में दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता को डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से जोडऩे की योजना बनाई है जिसे स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना का नाम दिया गया है। सबसे पहले पश्चिमी और पूर्वी रेड कॉरिडोर बन रहे हैं। फ्रेट कॉरिडोर पर मालगाडिय़ों की औसत गति 99 किलोमीटर प्रति घण्टा दर्ज गई है जो राजधानी ट्रेन की औसत गति 80 किमी/घण्टे से भी अधिक है।
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