NAND KISHORE SARASWAT
जोधपुर. प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े शहर और खुद मुख्यमंत्री के गृह जिले में जिला वन अधिकारी (डीएफओ ), सहायक वन संरक्षक (एसीएफ ) और क्षेत्रीय वन अधिकारियों (रेंजर्स ) के पद लंबे अर्से से रिक्त होने के कारण वनभूमि में अवैध खनन , वनभूमि पर अतिक्रमण , चराई , छंगाई , वन उपज की चोरी और वन्यजीवों का जीवन भी असुरक्षित होता जा रहा है। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण विभाग में छह माह से अधिक समय से जोधपुर जिला वन अधिकारी का पद रिक्त पड़ा है। अब वनविभाग वन्यजीव मंडल के उपवन संरक्षक भी इसी माह सेवानिवृत्त हो जाने के बाद पूरा वन महकमा बिना अधिकारियों के संचालित होगा। जोधपुर जिला ही नहीं जोधपुर संभाग के जिला वन मंडलों में 405 महत्वपूर्ण पद लंबे अर्से से रिक्त पड़े है। महत्वपूर्ण वन अधिकारियों के अभाव में वनकर्मियों को सहीं ढंग से दिशा निर्देश के अभाव में कार्य प्रभावित हो रहा है। नतीजन जोधपुर सहित पूरे संभाग में कुल 23 हजार 362 हेक्टेयर भूमि पर अवैध खनन, वन्यजीव शिकार और कब्जे की खेती पनपती जा रही है। अधिकारियों के अभाव में जोधपुर में होने वाली वन्यजीव गणना और मानसून में पौध वितरण कार्य भी प्रभावित होगा।
कोई अधिकारी जोधपुर आने को तैयार नहीं
वनों की प्रभावी सुरक्षा, संरक्षण और समुचित विकास की सुनिश्चता के लिए वन विभाग में समूचित कार्य विभाजन कर आवश्यकता के अनुरूप विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था निर्धारित की गई है । लेकिन मुख्यमंत्री के गृह जिले में ऐसी व्यवस्था लंबे अर्से से नदारद है। जोधपुर जिले में लंबे अर्से से अतिक्रमण, खनन और वन्यजीव शिकार मामलों से बचने के लिए आइएफएस अधिकारी जोधपुर आने को तैयार नहीं है। यही कारण है कि इसी माह सेवानिवृत्त हो रहे उपवन संरक्षक वन्यजीव के रिक्त पद के लिए जैसलमेर के सहायक वन संरक्षक को जोधपुर जिले का अतिरिक्त चार्ज सौंपने की तैयारी की जा रही है।
जोधपुर वनविभाग में रिक्त पद कार्यालय का नाम-------------------- स्वीकृत पद-------------कुल रिक्त पद
मुख्य वन संरक्षक जोधपुर कार्यालय -------53---------------------21
उपवन संरक्षक जोधपुर मंडल -----------195--------------------59--
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