जोधपुर. अफ्रीकी देशों में इस साल टिड्डी नियंत्रण कार्यक्रम बेहतर होने से भारत मेंं बड़े टिड्डी हमले की आशंका कम हो गई है। ईरान के दक्षिणी-पश्चिमी हिस्से में टिड्डी के कुछ अण्डों से हॉपर निकले हैं। राजस्थान में मानसून ऑनसेट होने से ये हॉपर वयस्क टिड्डी में रूपांतरित होकर पाकिस्तान के ब्लूचिस्तान होते हुए भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर आ सकते हैं, लेकिन ये इक्का-दुक्का छोटे टिड्डी दल ही होंगे और संभवत: जैसलमेर, बाड़मेर और जोधपुर तक ही सीमित रहेंगे।
संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएनओ) के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) की ओर से गत 3 जून को जारी टिड्डी बुलेटिन के अनुसार पूर्वी अफ्र्र ीका के इथोपिया और सोमालिया में ही बरसात होने से टिड्डी आबादी बढ़ा रही है। हॉर्न ऑफ अफ्रीका में ग्राउंड सर्वे के अलावा टिड्डी पर एरियल ऑपरेशन किए जा रहे हैं।
उधर, अरब प्रायद्वीप में टिड्डी की संख्या घटने लगी है। सऊदी अरब से लगते यमन में भी हॉपर बैंड कम हो गए हैं। केवल कुछ एकाकी जीवन व्यतीत करने वाली वयस्क टिड्डी (सोलेटरी) बची है, जिसमें दल बनाने की प्रवृत्ति नहीं होती।
इसके अलावा इराक, जॉर्डन, सीरिया और लेबनान में भी टिड्डी के खिलाफ ऑपरेशन जारी है। यहां अप्रैल में कुछ छोटे टिड्डी दल पहुंचे थे। दक्षिण पूर्वी एशिया में केवल ईरान में हॉपर बैंड के अलावा अवयस्क टिड्डी के छोटे दल हैं, जिनके अगले महीने मानसून आने पर पूरब की ओर आगे बढऩे की संभावना है।
इस बार थार पार करना मुश्किल
अफ्रीका के इथोपिया, सोमालिया, केन्या जैसे देश के टिड्डी के गढ़ माने जाते हैं। पिछले साल से लगातार पेस्टीसाइड स्प्रे बड़े स्तर पर होने से टिड्डी बहुत कम बची है। बारिश में टिड्डी तेजी से पनपती है। अगर ईरान से टिड्डी दक्षिण-पश्चिमी हवाओं के साथ पाकिस्तान-भारत बॉर्डर पर आ भी जाती है तो इस साल थार से आगे बढऩे की संभावना नहीं है।
26 साल बाद बड़ा हमला
- 104 बड़े टिड्डी दल गत वर्ष आए थे
- 11 मार्च 2020 को हॉपर बैंड भारत-पाक बॉर्डर की तारबंदी पार करके आए थे
- 30 मार्च 2020 को पहला टिड्डी दल आया था
- 1993 के बाद वर्ष 2020 में सबसे बड़े टिड्डी हमले में करोड़ों की फसल नष्ट हुई
- पिछले साल टिड्डी हमले से दक्षिण भारत और उत्तरी-पूर्वी राज्य ही अछूते रहे थे।
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