जोधपुर. डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन् राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय में स्थापित मानव संसाधन विकास केन्द्र द्वारा आयुर्वेद चिकित्सा विज्ञान में शरीर रचना के स्वनामधन्य व्यक्तित्व स्व. प्रो. दिनकर गोविन्द थत्ते की स्मृति में एक वेबिनार का आयोजन किया गया।
ऑनलाइन व्याख्यानमाला में गोवा स्थित गोमान्तक आयुर्वेद कॉलेज के शरीर रचना विभागाध्यक्ष प्रो. नीलेश कोर्डे ने अपने व्याख्यान में मानव शरीर के निर्माण में आत्मा, बुद्धि, अहंकार, पंचमहाभूत, मन व इन्द्रियों के भौतिक स्वरूप के साथ-साथ इनकी व्यावहारिक एवं आध्यात्मिक महत्ता के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि शरीर की विभिन्न भौतिक क्रियाओं का संचालन मन और इन्द्रियों के माध्यम से होता है। जब व्यक्ति आत्मा, मन व इन्द्रिय इन सब के क्रिया व्यापार के अन्तर्गत अनुकूल परिस्थिति में रहने पर प्रसन्न अथवा सुखी अनुभव करता है तो वह स्वस्थ व्यक्ति के रूप में जाना जाता है।
कुलसचिव सीमा कविया और मानव संसाधन विकास केन्द्र के मुख्य समन्वयक एवं चीफ प्रोक्टर डॉ. राकेश कुमार शर्मा ने बताया कि इस व्याख्यान में अमेरिका, इंग्लैण्ड आदि देशों सहित भारत के कई शिक्षकों एवं स्नातकोत्तर छात्रों ने भाग लिया।
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