जोधपुर. संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएनओ) के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने इस साल भारत में टिड्डी आने की बहुत कम संभावना बताई है। मंगलवार को एफएओ के अधीन दक्षिण पश्चिमी एशिया आयोग (स्वैक) की बैठक में बताया गया कि ओमान में टिड्डी बिल्कुल खत्म हो गई है। ईरान और यमन के रेगिस्तानी इलाके में जरूर टिड्डी मामूली दल है जो अधिक खतरनाक नहीं है। इस समय टिड्डी का सर्वाधिक प्रकोप दक्षिण पूर्वी इथोपिया और सोमालिया में है, जहां वह प्रजनन कर रही है।
स्वैक की बैठक हर साल जून से लेकर दिसंबर तक हर महीने होती है। इसमें भारत, पाकिस्तान, ईरान और अफगानिस्तान सदस्य है। मानसून के आने पर ही भारतीय उपमहाद्वीप में टिड्डी का खतरा बढ़ता है इसलिए हर साल इन्हीं छह महीनों के दौरान यूएनओ के नेतृत्व में स्वैक बैठक होती है। कोविड के कारण इस साल भी बैठक का आयोजन वर्चुअली किया गया। एफएओ के टिड्डी पूर्वानुमान अधिकारी कीथ क्रीसमैन ने बताया कि भारत और पाकिस्तान में अगले महीने टिड्डी की आशंका केवल 10 प्रतिशत रहेगी।
हवाएं पश्चिमी नहीं होने से टिड्डी का खतरा टला
पश्चिमी हवाएं अफ्रीका और खाड़ी देशों से होते हुए टिड्डी भारत तक पहुंचा देती है, लेकिन इस साल भारतीय उपमहाद्वीप में पश्चिमी हवाएं बहुत कम चली। लंबे समय से हवाओं की दिशा पश्चिमी नहीं है। इस कारण टिड्डी का खतरा भी टल गया। मानसून के थार में ऑनसेट होने पर भी आसपास टिड्डी नहीं होने से इसका जोखिम नहीं रहेगा।
आजादी के बाद से ही नियमित हो रही है बैठकें
टिड्डी से निपटने के लिए भारत और पाकिस्तान के अधिकारियों की बैठकेंआजादी के बाद से ही निरंतर बनी हुई है। कोरोना से पहले भारत और पाकिस्तान के अधिकारी सीमा पार करके एक दूसरे के देश में स्थित मुनाबाव व खोखरापार में बैठकें करते आए हैं। मंगलवार को हुई बैठक में भारत की ओर से कृषि मंत्रालय में पादप संगरोध विभाग के संयुक्त निदेशक एन. सत्यनारायण, टिड्डी चेतावनी संगठन जोधपुर के सहायक निदेशक डॉ वीरेंद्र कुमार और पाकिस्तान की ओर से वहां के कृषि विभाग के अधिकारी मोहम्मद तारीख शामिल हुए।
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