प्रथम पूज्य के द्वार एक भी निमंत्रण नहीं, अक्षय तृतीया पर कोरोना का साया

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जोधपुर. वैसाख शुक्ल पक्ष की तृतीया आखातीज को ‘अणपूछिया’ मुहूर्त की मान्यता के बावजूद इस बार भी सावे फीके रहेंगे। जोधपुर शहर सहित जिले और मारवाड़ के विभिन्न क्षेत्रों में १३ व १४ मई को करीब १५०० से अधिक वैवाहिक आयोजन संभावित थे लेकिन लॉक डाउन के कारण अधिकांश विवाह या तो स्थगित हो चुके है अथवा टाल दिए गए है। शहरवासियों के लिए प्रथम पूज्य रातानाडा गणेश मंदिर में एक भी विवाह का निमंत्रण पत्र नहीं पहुंचा है। मंदिर के पुजारी प्रदीप शर्मा ने बताया कि आखातीज पर अमूमन जोधपुर व जिले के विभिन्न क्षेत्रों से २०० से २५० निमंत्रण पत्र प्रथम पूज्य को चढ़ाने आते है लेकिन यह पहला मौका है जब एक भी निमंत्रण नहीं पहुंचा है।

आखातीज पर बन रहा है सुकर्मा योग
इस बार अक्षय तृतीया के दिन 14 मई को सुकर्मा योग बन रहा है । ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 12 महीने में 11 माह ऐसे हैं , जिसमें युगादि , मन्वादि तिथियों का संयोग आता है। जिस समय युग का आरंभ हुआ हो , वह युगादि तिथि का केंद्र बिंदु चक्र में आता है , हालांकि यह स्पष्ट है कि मूल रूप से युगादि तिथि वैशाख शुक्ल तृतीया मानी गई है , परंतु इसमें दक्षिण का गणित थोड़ा अलग है । इस बार अक्षय तृतीया को तिथि 60 घटी की रहेगी। मृगशिरा नक्षत्र , सुकर्मा योग , तैतिल करण तथा वृषभ राशि का चंद्रमा रहेगा । शास्त्रीय मान्यता के आधार पर अक्षय तृतीया पर दो घट का विधिवत पूजन करके दान करना चाहिए । इस दिन किया गया दान अक्षय माना जाता है। पितरो का तर्पण और पिण्डदान करना भी शुभ है।



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