बिलाड़ा (जोधपुर). कस्बे अस्पताल यूं तो सौ बेड का कर दिया गया है , लेकिन यहां एक अरसे से शिशु विशेषज्ञ के पद खाली हैं। ऐसे में बच्चों के बीमार होने पर परिजनों की क्या स्थिति बनती होगी इसे सहज समझा जा सकता है।
अब जब चर्चा जोरों पर है कि कोरोना की तीसरी लहर गर्भवती महिलाओं एवं नन्हे बच्चों के लिए भारी साबित हो सकती है। ऐसे में यहां जननी सुरक्षा योजना के तहत जिन महिलाओं ने इन 4 महीनों प्रसव कराए हैं, उन एक हजार के करीब बच्चों के परिजन सकते में हैं।
उन्हें आशंका है कि यदि कोई बच्चा संक्रमित होता है तो वह कहां कहां भागेंगे। दूसरी लहर में भी 9 दिनों से 12 वर्ष के कुछ शिशु संक्रमित हो चुके हैं। इन बच्चों में सांस लेने की ज्यादा दिक्कत रही तथा अन्य चिकित्सकों की देखरेख के बावजूद रिकवरी होने में ज्यादा समय लगा।
महिला चिकित्सालय में नहीं है एक भी शिशु विशेषज्ञ
मरुधर केसरी जैन रेफरल चिकित्सालय की एक फैकल्टी आईजी महिला चिकित्सालय है। यहां गायनिक चिकित्सक तो है, लेकिन 6 माह के शिशु चिकित्सक के पद रिक्त हैं। यहां पहले शिशु चिकित्सक के पद पर आरिफ मोहम्मद थे जो पदोन्नति के बाद जोधपुर चले गए, एक अन्य शिशु चिकित्सक जो संविदा पर लगे हुए थे उनको स्थाई नियुक्ति सोजत में दे दी गई। तब से बिलाड़ा के इस सौ बेड वाले बड़े चिकित्सालय में एक भी शिशु चिकित्सक नहीं है।
ये शिशु किसके भरोसे
वर्ष 2021 के लगने के साथ ही यहां के महिला चिकित्सालय में 25 मई तक 358 शिशुओं ने जन्म लिया। इनसे पहले वर्ष 2020 में 1668 तथा 2019 में 1209 शिशुओं ने जन्म लिया। इस सरकारी संख्या से ही सहज समझा जा सकता है कि सैकड़ों शिशुओं के रहते शिशु चिकित्सकों का सरकारी अस्पताल में रहना कितना आवश्यक है। भगवान करे तीसरी लहर टल जाए और गर्भवती महिलाएं और नन्हे शिशु सुरक्षित रह जाए।
इन्होंने कहा
पुरजोर लेखनी एवं व्यक्तिगत रूप से भी जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से आग्रह किया जा चुका है कि बिलाड़ा रेफरल चिकित्सालय में अविलम्ब वरिष्ठ शिशु रोग चिकित्सक लगाया जाए।
जितेंद्रसिंह चारण, बीसीएमओ, खण्ड बिलाड़ा
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