जोधपुर। प्रदेश में कोविड-19 के उपचार में अब ऑक्सीजन की किल्लत नहीं है, लेकिन टोसिलीजुमेब इंजेक्शन की आपूर्ति में कमी के म²ेनजर विशेषज्ञों की सलाह पर विकल्प के रूप में आइटोलीजुमेब इंजेक्शन की खरीद की जा रही है। राजस्थान हाईकोर्ट में बुधवार को एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की पालना रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।
न्यायाधीश विजय बिश्नोई व न्यायाधीश रामेश्वर व्यास की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता सुरेन्द्र जैन की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान एएजी राजपुरोहित ने बताया कि पूर्व में सक्रिय मामलों की संख्या के आधार पर केंद्र से आवंटित ऑक्सीजन कोटा राज्य में ऑक्सीजन की वास्तविक खपत की तुलना में बहुत कम था। राज्य सरकार ने बार-बार ऑक्सीजन के कुल आवंटन में वृद्धि की बात रखी। अभी ऑक्सीजन की दैनिक खपत 395 मीट्रिक टन और उपलब्धता लगभग 650 मीट्रिक टन है, जिसमें 505 मीट्रिक टन केंद्र से है।
उठानी पड़ी मुश्किलें
राज्य सरकार ने कहा कि केंद्र ने पहले सुदुर ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्रों के माध्यम से राज्य को ऑक्सीजन आवंटित की थी। वहां से आवंटित ऑक्सीजन उठाने के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ा। बार-बार अनुरोध पर आस-पास के स्थानों से ऑक्सीजन का अधिक आवंटन सुनिश्चित किया गया। ऑक्सीजन परिवहन वाहनों की कमी के कारण भी राज्य आवंटित ऑक्सीजन को समय पर नहीं उठा पा रहा था। राज्य सरकार ने नाइट्रोजन और ऑर्गन गैस टैंकर को ऑक्सीजन टैंकर में बदलने के प्रयास किए। राज्य में 50 एलएमओ परिवहन टैंकर ऑक्सीजन के परिवहन के काम आ रहे हैं।
टोसिलीजुमेब की आपूर्ति कम
पालना रिपोर्ट में बताया गया है कि केंद्र ने राज्य को 2,48,000 रेमडेसिवीर इंजेक्शन आवंटित किये थे। अभी 40,426 रेमडेसिवीर इंजेक्शनों की आपूर्ति बाकी हैं। इसी तरह केंद्र से आवंटित 2185 टोसिलीजुमेब इंजेक्शन की आपूर्ति हो गई हैं। टोसिलीजुमेब इंजेक्शन की कम आपूर्ति को देखते हुए इसके विकल्प के रूप में विशेषज्ञों की सलाह पर आइटोलीजुमैब इंजेक्शन की खरीद की जा रही है।
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