उज्बेकिस्तान-रूस की मशीनों से मारवाड़ में उखड़ती सांसें बचाने के हुए प्रयास

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जोधपुर।
कोरोना जब अपनी पीक की ओर बढ़ रहा था और लोगों को अस्पतालों में बेड व ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए मशक्कत करनी पड़ रही थी तब प्रवासियों ने माटी के प्रति अपना फर्ज निभाते हुए जयपुर फुट यूएसए के जरिए उज्बेकिस्तान व रूस से ऑक्सीजन कंसंट्रेटर मशीनें मारवाड़ पहुंचा कर लोगों की सांसे बचाने के प्रयास किए। यह प्रयास अनवरत जारी हैं। अब तक 252 मशीनें भारत आ चुकी हैं।

जयपुर फूट यूएसए के चेयरमैन प्रेम भंडारी ने टेलीफोन पर राजस्थान पत्रिका को बताया कि 5 मई को उज्बेकिस्तान से पहली खेप आई थी। इसमें से जोधपुर ब्रीथ बैंक को 11 मशीनें उपलब्ध करवाई गई और बाद में 10 मशीनें और दी। अमरीका से यदि यह मशीनें भेजी जाती तो 300 से 900 डॉलर का खर्च आता और मशीनें की लागत अलग थी। जबकि उज्बेकिस्तान व रूस से 360 व 400 डॉलर प्रति मशीन में खरीद हो गई और 23 से 40 डॉलर के बीच इसे भारत भेजने का खर्च आया। विदेश सचिव हर्षवर्धन सिंगला, संयुक्त सचिव संदीप चक्रवर्ती, राजदूत मनीष प्रभात और द्वितीय सचिव अदिती वालुंज के प्रयासों से यह काम हो पाया। ताशकंद में भारतीय दूतावास की पहल पर रूस की कंपनी से यह मशीनें मिली। राणा कनाडा के फाउंडर व पूर्व अध्यक्ष योगेश पालीवाल की ओर से 50 मशीेनें सेवा भारती जयपुर को उपलब्ध करवाई गई हैं।
कोई खरीद नहीं सकता

भंडारी ने कहा कि जयपुर फुट यूएसए व भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति इन मशीनों को जरूरतमंदों को निशुल्क उपलब्ध करवा रही है। इसे किसी प्रकार की राशि या चंदे से खरीदा नहीं जा सकता।
बिहार-बंगाल तक पहुंची मदद

इन मशीनों की मदद प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों तक तो पहुंची ही है, साथ ही बिहार के दरबंगा में 2 मशीनें व कनक गोलिया की अनुशंसा पर कलकत्ता में विमान के जरिये 5 मशीनें भेजी गई। जयपुर फुट यूएएस ने कस्टम अधिकारी अर्जुनलाल और जीएसटी में राहत देने पर राज्य सरकार का आभार जताया।



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