जोधपुर. मथुरादास माथुर अस्पताल में म्यूकरमाइकोसिस से शनिवार को पहली मौत हुई। शहर के रहने वाले ६१ वर्षीय राधेश्याम ने बीती रात ऑपरेशन के बाद अपराह्न को एकदम से दौरा पडऩे से दम तोड़ दिया। अच्छी बात यह है कि एम्स और एमडीएम अस्पताल में कई मरीज ब्लैक फंगस (म्यूकरमाइकोसिस) को हराकर ऑपरेशन के बाद तेजी से स्वस्थ भी हो रहे हैं। दोनों अस्पतालों में एक दो दिन में दो-तीन मरीजों को छुट्टी दी जाएगी। बीमारी के इलाज में काम आने के लिए लिपोसोमल एम्फोटेरेसिन बी-५० मिलीग्राम इंजेक्शन कुछ कमी जरुर है लेकिन फिर भी सभी मरीजों के लिए इंतजाम हो रहा है।
राधेश्याम को कोविड के बाद म्यूकर माइकोसिस हो गया था। साइनस के आसपास ब्लैक फंगस काफी हो गई थी। शुक्रवार रात को उनका ऑपरेशन करके फंगस के हिस्से को हटा दिया गया। शनिवार दोपहर तक वे स्वस्थ थे और डॉक्टरों से बात कर रहे थे। अपराह्न को अचानक दौरा पड़ा और उनकी सांसें टूट गई। डॉक्टरों का कहना है कि म्यूकर की वजह से मरीज की खून की नलिकाओं में कई बार एम्बोलाई बन जाते हैं। थ्रोम्बोसिस की वजह से अचानक से दौरा पड़ता है तो मरीज की मौत हो जाती है। एेसे में मरीज को ब्लैक फंगस नजर आने पर तुरंत इलाज लेना चाहिए।
एम्स में ६५, एमडीएम में २७ मरीज
शहर में म्यूकर माइकोसिस के ९१ मरीज भर्ती है। इसमें से ६५ एम्स जोधपुर और २७ एमडीएम अस्पताल में भर्ती है। शनिवार को भी एक दर्जन से अधिक मरीजों के सफल ऑपरेशन किए गए। दोनों ही अस्पतालों में चिकित्सकों की टीम २४ घण्टे ड्यूटी दे रही है।
कोरोना से ठीक हुए मरीज डायबिटीज चैक कराएं
म्यूकरमाइकोसिस में अधिकांश में रोगी अनियंत्रित डायबिटीज के हैं। डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना के इलाज में स्टेरॉइड का अधिक उपयोग होने से कई बार रोगी को डायबिटीज हो जाती है। एेसे में सभी कोरोना रोगियों को डायबिटीज जांच करवानी चाहिए।
यह है बीमारी के लक्षण
- नाक बंद, नाक से खून आना
- डायबिटीज के समस्त लक्षण
- तालू या जीभ पर काले धब्बे
- सिरदर्द या मुंह का टेढ़ा हो जाना
(अनियंत्रित डायबिटीक मरीज और कोरोना से ठीक हुए मरीज सावधान रहे।)
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