कोरोना बीमारी से बड़ा ‘ कोराना का खौफ’

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केस-1 रामसागर निवासी फायरसिंह गहलोत (55) घर में गिर गए। एमजीएच ले जाने पर सीधा कोविड वार्ड में भर्ती कराया। रिपोर्ट नेगेटिव थी। घर पहुंचने के बाद दो दिनों तक मन में कोरोना का खौफ बैठा रहा और तीसरे दिन सुबह सोते ही रह गए।
केस-2 उम्मेद चौक निवासी प्रशांत (25) को कोराना होने पर एमजीएच में भर्ती कराया गया। लगातार डरने के कारण उनका ऑक्सीजन सेचुरेशन कम हो रहा था। नर्स अरविंद अपूर्वा ने उसे आधे घण्टे तक समझाया। अंत में मजबूती से हैंडशेक करके जल्द छुट्टी का आश्वासन दिया।
केस- 3 रातानाडा निवासी राकेश बोराणा (45) को परिवार में कोविड से मौत का समाचार सुनने के बाद एकदम से बुखार आ गया। परिजनों ने जैसे-तैसे उनको घर पर ही संभाला।
केस-4 सरदारपुरा निवासी गुंजन (29) को तीन महीने का गर्भ है। कोरोना के डर से वह सहमी-सहमी सी रहती है। परिजन परेशान हैं कि इसका नकारात्मक असर गर्भस्थ शिशु पर नहीं पड़ जाए।
केस-5 सिंधी कॉलोनी निवासी नितेश (16) को मोबाइल पर सोशल मीडिया के माध्यम से हर रोज कोरोना से मौतों की सूचना देखकर एंजाइटी हो गई है। परिजनों ने फोन पर डॉक्टरों से सम्पर्क कर इलाज लिया।

जोधपुर. दो दिन पहले ही दिल्ली हाईकोर्ट ने टिप्पणी की थी कि कोरोना के खिलाफ यह लड़ाई नहीं जंग है और इस जंग के प्रमाण हमारे जोधपुर में स्पष्ट तौर पर देखने को मिल रहे हैं। अप्रेल के दूसरे पखवाड़े में कोरोना के बढ़ते संक्रमण और हर रोज बढ़ रही मौतों ने लोगों में मानसिक अवसाद हो गया है। कोरोना से कहीं अधिक कोरोना के खौफ से लोगों की इम्यूनिटी कम हो रही है और वायरस की चपेट में आ रहे हैं। इसके शिकार खुद डॉक्टर्स भी है। पिछले एक पखवाड़े में लोगों में फोबिया, ऑब्सेसिव कंपल्सीव डिसऑर्डर, पेनिक अटैक, इनसोमिया, एंजाइटी, हाई ब्लड प्रेशर जैसे लक्षण देखने को मिल रहे हैं।

चारों तरफ कोरोना ही कोरोना, घिर गए लोग
- अस्पतालों के कोविड वार्डों में हर रोज कोई न कोई मौत हो रही है। मरीज सोच रहा है उसका सीटी स्कोर 20 है और मरने वाले का तो 18 था, अब मेरा क्या होगा।
- शहर में शायद ही ऐसा कोई हो, जिसके परिवार, नाते रिश्तेदारी अथवा मित्र की कोरोना से मौत नहीं हुई हो।
- अस्पताल में बेड, ऑक्सीजन व दवाइयों की कमी से लोग डिप्रेशन में हैं कि कहीं उन्हें कुछ हो गया तो वे अस्पताल में भर्ती कैसे होंगे।
- अस्पताल में भर्ती मरीजों में डर है कि वे घर जा पाएंगे कि नहीं।
- अखबार में हर रोज 3-4 पेज के शोक संदेश आ रहे हैं जिससे लोगों में दहशत है।
- परीक्षाएं, कक्षाएं, खेल, त्योहार, शादी-समारोह, जन्मदिन की पार्टियां, मित्रों से मिलना-जुलना सब बंद है। टीवी, रेडियो, समाचार पत्र, वेबसाइट्स, फेसबुक, ट्विटर, इंसटाग्राम, वाट्सएप स्टेट्स सब जगह कोराना फैला हुआ है।

फिजीशियन को छोडकऱ अन्य डॉक्टर भी खौफ में
इस बार कोरोना अधिक फैलने के कारण डॉक्टरों की कमी हो गई। मेडिसिन को छोडकऱ अन्य सभी विभागों पीडियाट्रिक, सर्जरी, गाइनी, ऑर्थोपेडिक, न्यूरो, नेफ्रो, यूरो, रेडियोलॉजी, साइकेट्री रेडियोग्राफी, पैथोलॉजी, कार्डियोलॉजी, ईएनटी, स्किन, डेंटल जैसे विभागों के डॉक्टर भी कोविड ड्यूटी दे रहे हैं। कोरोना से अधिक सामना नहीं करने के कारण इन विभागों के कई डॉक्टर्स भी मानसिक अवसाद में है।

‘आम लोगों के पास अत्यधिक सूचनाएं पहुंचने के कारण नेगेटिविटी बहुत हो गई है। हर कोई खुद को विशेषज्ञ समझकर मेडिकल साइंस की प्रोब्लम सॉल्व करने में लगा है। लोगों में हमें अब पॉजिटिव वेव भरने की आवश्यकता है।’
- डॉ नवीन किशोरिया, फिजिशियन, एमडीएम अस्पताल जोधपुर

‘दिन भर कोरोना की खबरें मत देखो। एक-दूसरे में पॉजिटिवटी का संचार करो। कोरोना से हर कोई नहंी मर रहा है। यह भी समझो।’
- डॉ संजय गहलोत, मनोरोग चिकित्सक, एमडीएम अस्पताल



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