जोधपुर. अगर आप की भी आंखें लाल हैं। हल्का सा दर्द हो रहा है। कभी-कभी पानी आ रहा है और आपको ब्लैक फंगस का खौफ सता रहा है तो शहर में आप अकेले नहीं हैं। मथुरादास माथुर अस्पताल में एक महीने बाद सोमवार से शुरू हुई नेत्र रोग विभाग की ओपीडी में दो तिहाई मरीज केवल ब्लैक फंगस (म्यूकर माइकोसिस) के खौफ से पहुंचे। वास्तव में इन मरीजों में फंगस जैसे कोई लक्षण नहीं थे। डॉक्टरों ने ओपीडी पर्ची पर ही इनका इलाज लिख दिया।
ओपीडी में सोमवार को पहले दिन 75 मरीज डॉक्टर से परामर्श लेने पहुंचे। इसमें से 50 मरीज केवल फंगस के संदेह में डॉक्टर के पास आए। यह जरुर है कि उनकी आंखों में लालिमा था। वह दर्द हो रहा था। आंखें लाल होने का 25 फीसदी कारण एलर्जी थी। इतने ही मरीज ऐसे थे जो लगातार कम्प्यूटर पर काम करने की वजह से अपनी आंखें लाल कर बैठे थे। कुछ में हल्का संक्रमण था जो एंटीबायोटिक दवाई से ठीक हो जाता है।
घबराओ मत, ब्लैक फंगस का इलाज ईएनटी में
ब्लैक फंगस के वर्तमान में सभी मरीज नाक, कान व गला रोग (ईएनटी) विभाग में भर्ती है। अधिकांश मामलों में फंगस साइनस के जरिए शरीर में प्रवेश करती है। वैसे भी ब्लैक फंगस का संदेह होने पर डॉक्टर सबसे पहले आंखों के ऑर्बिट व साइनस की एमआरआई कराएगा। इसमें म्यूकस भरा होने पर वायरल, बैक्टिरियल अथवा फंगल संक्रमण की पुख्ता जानकारी के लिए बायोप्सी कराएगा।
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एक में भी लक्षण नहीं थे
पूरी ओपीडी में एक भी व्यक्ति में म्यूकरमाइकोसिस के लक्षण नहीं थे। केवल डर था।
डॉ. अरविंद चौहान, नेत्र रोग विभागाध्यक्ष, एमडीएम अस्पताल
यहां भी 50 में से 10 मरीज ब्लैक फंगस संदेह के
हमारे यहां प्रतिदिन करीब 50 ओपीडी रहती है। इसमें 10-12 मरीज ऐसे आते हैं जो केवल ब्लैक फंगस का संदेह लेकर आते हैं लेकिन होता किसी में नहीं।
डॉ अजीत जाखड़, नेत्र रोग विशेषज्ञ व प्रभारी पावटा जिला अस्पताल
डायबिटीज नहीं तो ब्लैक फंगस भी नहीं
कोरोना के मरीजों को पेशाब बहुत आ रहा है। उसमें डायबिटीज हो रही है। ऐसे में रोगी सबसे पहले डायबिटीज चैक कराएं। डायबिटीज नहीं तो ब्लैक फंगस भी नहीं। वर्तमान में सभी भर्ती मरीज डायबिटीक है।
डॉ महेंद्र चौहान, नाक-कान-गला रोग विशेषज्ञ, एमडीएम अस्पताल
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