जोधपुर. जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के हिंदी और पत्रकारिता विभाग के संयुक्त तत्त्वावधान में व्याख्यानमाला की 27वींश्रृंखला में रविवार को हिंदी के प्रमुख नाटक और नाटक विषय पर आयोजित की गई।
मुख्य वक्ता ख्यातनाम साहित्यकार हरीश नवल ने आधुनिक काल के हिंदी नाटककार भारतेंदु हरिश्चंद्र के राष्ट्रीय अनुराग, नाट्यकर्म और अभिनय कौशल से हिंदी नाटक की यात्रा आरंभ की, जिसके महत्त्वपूर्ण स्तंभों में जयशंकर प्रसाद का चंद्रगुप्त, उपेंद्र नाथ अश्क का अंजो दीदी, पृथ्वीराज कपूर के नाटक ग़दर ,पठान ,दीवार, आहुति जैसे सांप्रदायिक सद्भावना पर आधारित नाटकों का विश्लेषणात्मक परिचय दिया। इसी के साथ ही जगदीश चंद्र माथुर का कोणार्क और हिंदी नाट्य विधा का सर्वाधिक चर्चित और मंचित नाटक धर्मवीर भारती का अंधायुग की प्रतीकात्मकता और पात्र- चर्चा को स्पष्ट किया। लक्ष्मीनारायण लाल के मादा कैक्टस तथा मोहन राकेश के शब्द, रंगसंकेत और अभिनय की दृष्टि से बेहतरीन नाटकों आधे अधूरे ,आषाढ़ का एक दिन को प्रतिपादित किया। सुरेंद्र वर्मा के द्रोपदी तथा मणि मधुकर का एब्सर्ड से लोकनाट्य शैली को जोड़ते हुए नाटकों की मौलिक कल्पना को उजागर करते हुए आपने मीराकांत जैसे नाटककारों के विविध आयामों पर विस्तृत चर्चा की।
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए संगोष्ठी के निदेशक व हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर नरेंद्र मिश्र ने अपने उद्बोधन में कहा कि नाट्य विधा सर्वाधिक लोकप्रिय विधाओं में से एक है, जिसमें भारतीय संस्कृति की छवि परिलक्षित होती है। प्रोफेसर मिश्र ने भारतीय नाटक की उत्पत्ति और उसकी परंपरा पर प्रकाश डाला।इसी के साथ प्रोफ़ेसर मिश्र ने आभासी मंच पर उपस्थित सभी अतिथियों का स्वागत किया।
हिंदी नाटक की विकास यात्रा को सहज शैली में प्रस्तुत करते हुए आपने बताया कि संस्कृत के नाटकों का प्रभाव पूरी दुनिया पर है और हिंदी के नाटकों पर भी नजर आता है। एक नाटककार और एक रंगकर्मी दोनों दृष्टिकोण से आपने हिंदी नाट्य कला का विवेचन करते हुए ज्ञानवर्धक वक्तव्य प्रदान किया।
संचालन संगोष्ठी की संयोजिका डॉक्टर कामिनी ओझा ने किया तथा मुख्य वक्ता का विधिवत परिचय डॉ फत्ताराम नायक ने दिया। तकनीकी संयोजन डॉ विनिता चौहान का तथा मीडिया संयोजन डॉ महेंद्र सिंह व डॉ प्रवीण चंद का रहा। कार्यक्रम में प्रोफ़ेसर किशोरी लाल अधिष्ठाता कला संकाय, डॉक्टर महीपाल सिंह राठौड़ अध्यक्ष पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग, प्रोफेसर सरोज कौशल, डॉश्रवण कुमार ,डॉ कीर्ति माहेश्वरी, डॉ कमला चौधरी, डॉ भरत कुमार , डॉ फत्ताराम एवं अरविंद जोशी सम्मिलित हुए। कार्यक्रम में प्रो. शिवप्रसाद शुक्ल, प्रो. अलका पांडेय, डॉ. नीतू परिहार, डॉ. रामकिंकर पांडेय, डॉ. सतीश चतुर्वेदी, प्रताप सहगल, प्रो. सरोज कौशल, डॉ. सरला पंड्या, प्रो. पुष्पा गुप्ता, डॉ प्रगति गुप्ता, मीनाक्षी जोशी, वाणी गुप्ता, डॉ वसुंधरा उपाध्याय, सहित भारत के विभिन्न राज्यों से हिंदी साहित्यप्रेमियों ,शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/3mEItO0
0 comments:
Post a Comment