लक्ष्य बिना कैसे साकार होगा पूर्ण जैविक कृषि का सपना

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जोधपुर।

सरकार की ओर से जैविक कृषि को बढ़ावा व किसानों को प्रोत्साहन देने के लिए परम्परागत कृषि विकास योजना ( पीकेवीवाइ) योजना चलाई जा रही है। इसके लिए खरीफ फ सल बुवाई से पहले किसानों के लिए लक्ष्य व विभिन्न जारी किए जाते है, लेकिन सरकार के उदासीन रवैये के कारण योजना के लक्ष्य जारी करने में ही देरी की जा रही है, इस वजह से किसानों को योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। परिणामस्वरूपए योजना में करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद योजना का लक्ष्य धराशायी होता दिख रहा है। कृषि विभाग के अधिकारी के अनुसार नई गाइडलाइन इस माह जारी होने की संभावना है, तब ही लक्ष्य जारी होने की उम्मीद है।

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अभी तक जारी नहीं हुए लक्ष्य

राज्य सरकार की ओर से वर्ष 2015-16 के बजट में राज्य में जैविक कृषि के प्रसार के लिए 11 जिलों में एक-एक पंचायत समिति का चयन कर समिति क्षेत्र के सभी किसानों को 3 वर्ष में 50-50 के समूह बनाकर जैविक कृषि का प्रशिक्षण देने का प्रावधान रखा। वर्तमान में 2018-19 अधिसूचना के तीन वर्षीय कार्यक्रम चल रहे है। वही, इस वर्ष 2021-22 के लक्ष्य अभी तक जारी नहीं हुए है।

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यह है उद्देश्य

भारत सरकार के सहयोग से परम्परागत कृषि विकास योजना के तहत डुंगरपुर सहित प्रदेश के 11 जिलों की 11 पंचायत समितियों को पूर्ण जैविक कृषि क्षेत्र बनाने का लक्ष्य रखा गया। इसमें जोधपुर का लूणी पंचायत पंचायत समिति भी शामिल है। योजना के तहत किसानों के क्लस्टर बनाना, बैठकों का आयोजन करना, खेती में रसायन के प्रयोग को खत्म कर किसानों को कम लागत की कृषि से जोडऩे, रासायनिक खाद के अत्यधिक प्रयोग को कम करने व भोजन में रसायनों के प्रभाव से होने वाली बीमारियों से बचने के लिए शुद्ध फ सल उत्पादन के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने व चयनित किसानों को जैविक खेती फ ाम्र्स का भ्रमण कराना शामिल है।

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