जोधपुर. दैत्यों के गुरु, भाग्य के कारक और समस्त प्रकार के भौतिक सुखों को प्रदान करने वाले शुक्र देव 10 अप्रेल को मीन राशि से मेष राशि में गोचर कर 4 मई 2021 तक स्थित रहेंगे। इसके बाद ये अपनी स्वराशि वृषभ में जाएंगे। शुक्र ग्रह को भौतिक सुख-सुविधा, प्रेम, विलासिता प्रदान करने वाला माना जाता है। ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि नवग्रहों में शामिल छठा ग्रह शुक्रवृषभ और तुला राशि का स्वामी माना जाता है। शुक्र एक शुभ ग्रह है यदि शुक्र कुंडली में मजबूत होता है तो जातकों को इसके अच्छे परिणाम मिलते हैं जबकि कमज़ोर होने पर यह अशुभ फल देता है। शुक्र को 27 नक्षत्रों में से भरणी पूर्वा फाल्गुनी और पूर्वाषाढ़ा नक्षत्रों का स्वामित्व प्राप्त है। ग्रहों में बुध और शनि ग्रह शुक्र के मित्र ग्रह हैं जबकि सूर्य और चंद्रमा इसके शत्रु ग्रह माने जाते हैं।
राशि परिवर्तन का प्रभाव
शुक्र के राशि परिवर्तन देश की अर्थव्यवस्था के लिए शुभ रहेगा। सब्जियां, तिलहन और दलहन की कीमतें कम होंगी। कीमती धातुओं के भाव में वृद्धि और राजनीति में उतार-चढ़ाव होता है
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