जोधपुर।
जोधपुर जिले के मथानिया कस्बे की लाल मिर्च दुनिया में अपनी अलग पहचान रखती है। इसी वजह से बरसों से मथानिया और लाल मिर्च एक-दूसरे के पर्याय बने हुए है। मथानिया में बड़े पैमाने पर लाल मिर्च की खेती की जाती है। मारवाड़ के सर्द मौसम में पकने के साथ इसका सुर्ख लाल रंग और ज्यादा निखर जाता है। पकने में मिर्च को खुले में सुखाया जाता है, तो ऐसा लगता है कि धरती ने लाल रंग चादर ओढ़ ली हो। कभी 70 हजार हैक्टेयर में उगने वाली मिर्ची के एक ही खेत के बार-बार बुवाई करने से नीमाटोड जैसे सूत्रकृमि लगने व भूजल के गहरे चले जाने से पानी में लवण की अधिकता के चलते मथानिया क्षेत्र में मिर्ची की खेती लुप्त प्राय: सी हो गई थी। जो जैविक पद्दति के साथ ड्रिप सिंचाई अपनाने से फि र से खेतों में लहराने लगी है। ऐसे में एक बार फिर से मथानिया की मिर्च विश्व में अपना लोहा मनवाने की तैयारी में है।
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450 मीट्रिक टन से अधिक के उत्पादन की उम्मीद
इस बार किसानों ने 500 हैक्टेयर से अधिक क्षेत्र में मिर्ची की बुवाई की थी, जहां 450 मीट्रिक टन से अधिक के उत्पादन की उम्मीद है। क्षेत्र के मिर्च उत्पादक किसानों के अनुसार जैविक पद्दति से कीट नियंत्रण, मिट्टी उपचार व ड्रिप सिंचाई के साथ समन्वित कृषि प्रबंधन से फ सल बुवाई रकबा बढऩे की उम्मीद है।
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- 500 हैक्टेयर में बुवाई।
- 450 मीट्रिक टन मिर्च उत्पादन की उम्मीद।
- अमरीका, अरब देश, इंडोनेशिया, ब्रिटेन आदि देशों में होती है निर्यात।
- 'मंडोरिया मिर्चÓ कृषि अनुसंधान केंद्र मंडोर द्वारा विकसित की गई नई किस्म।
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