ऐसे बढ़ा पिछले एक साल में कोरोना
माह - संक्रमितों की संख्या
मार्च-7
अप्रेल-510
मई- 1530
जून-2793
जुलाई-6851
अगस्त-12896
सितंबर- 25703
अक्टूबर-37017
नवंबर- 54948
दिसंबर 59945
इस साल 2021 में अब तक
जनवरी-957
फरवरी-373
मार्च - 350 से ज्यादा रोगी
कुल रोगी इस साल में 1680 से ज्यादा
जोधपुर. कोरोना संक्रमण के विकराल और मंद रूप को देखते जोधपुर को 21 मार्च को एक साल पूरा हो गया। अब तक 61616 रोगी संक्रमित हुए हैं और 927 लोगों को खोया है। संक्रमण की रफ्तार जोधपुर में कभी मंद तो कभी तेज भी रही। मार्च से जून तक सौ के मध्य आने वाली कोरोना की संख्या भी थ्री डिजीट में देखने को मिली। इतना ही नहीं, सितंबर और नवंबर माह में जोधपुर में कोरोना संक्रमण के 5 सौ और एक हजार के बाहर तक आए। खौफ के साए के बीच जोधपुर ने ढाई माह तक कफ्र्यू, साप्ताहिक लॉकडाउन व लम्बे समय तक नाइट कफ्र्यू झेला है। लेकिन अब पिछले कुछ दिनों में लापरवाही सामने आ रही है। यदि अन्य शहरों की तरह फिर से केस बढ़े तो कहीं मार्च महीने में फिर एक से फिर पहले जैसे हालात देखने पड़ सकते हैं।
सख्ती के साथ रेंडम टेस्टिंग की तैयारी
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दो दिन पहले जिला कलक्टर्स व अन्य अधिकारियों के साथ वी.सी की थी। जिसमें पुन: सख्ती के संकेत दिए थे। फिलहाल जागरूकता कार्यक्रम तो जोधपुर में फिर से शुरू कर दिया गया है। साथ ही सीएम ने रेंडम टेस्टिंग को फिर से बढ़ाने के निर्देश भी दिए। जिसे पुन: शिविर लगाकर व अस्पतालों में चार माह पहले जैसी व्यवस्था देखने को मिल सकती है। फिलहाल शहर में 3 से 4 प्रतिशत की संक्रमण दर है। प्रतिदिन औसतन 1 हजार से 15 सौ के बीच सैम्पल लिए जा रहे हैं।
पहला संक्रमित 21 को आया, 22 को बताया
जोधपुर में कोरोना संक्रमण का पहला केस 21 मार्च की रात को सामने आ गया था, लेकिन प्रशासन ने 22 की सुबह मरीज के सामने आने की पुष्टि की। शास्त्रीनगर सी सेक्टर निवासी युवक के पॉजिटिव आने के बाद गत 23 मार्च को उसके चाचा-चाची भी संक्रमित निकले। ये सभी तुर्की से यात्रा कर जोधपुर लौटे थे।
रास्ते करते थे बंद, होता था हाइपो का छिड़काव
जोधपुर में कोरोना संक्रमित के सामने आने की पुष्टि के बाद जोधपुर की सड़कों पर सन्नाटा पसरने लग गया। लोग दीवारों के हाथ लगने से डरते थे। इतना ही नहीं, जिस क्षेत्र से संक्रमित सामने आता था, उस क्षेत्र के रास्ते बंद कर दिए जाते थे। वहां नगर निगम के वाहनों के जरिए हाइपोक्लोराइड से छिड़काव तक किया जाता था। लेकिन अब संक्रमितों के परिजन भी आजकल 17 दिन तक घर में क्वॉरंटाइन तक नहीं रहते है।
लाइफ स्टाइल में बदलाव
- मास्क शरीर का एक अंग हो गया।
- बैग व जेब में लोग सेनिटाइजर रखने लगे।
- हाथ मिलाने की जगह नमस्कार को अपनाया।
- बेवजह लोग भीड़ में शामिल होने या रिश्तेदारों के घर जाने से भी बचने लगे।
- शादियों में भी कुछ समय तक सादगी देखी गई।
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पिछले साल ऐसा था खौफ का मार्च
- गत 22 मार्च को शाास्त्रीनगर सी सेक्टर कोरोना संक्रमित के सामने आने की पुष्टि प्रशासन ने सार्वजनिक कर दी थी। शहर में दहशत का माहौल हो गया।
- गत 23 मार्च को पहले संक्रमित के चाचा-चाची भी पॉजिटिव निकले। ये सभी तुर्की से जोधपुर आए थे।
- गत 24 मार्च तुर्की से लौटे वृद्ध दंपती के साथ ट्रेन में आई एक युवती भी निकली संक्रमित।
- गत 26 मार्च को लंदन से एमबीए कर रहा छात्र और 27 मार्च को लंदन से आए छात्र का साथी भी निकला पॉजिटिव।
- गत 30 मार्च को लंदन से लौटा एक छात्र संक्रमित आया।
- गत 31 मार्च को इरान से आए भारतीयों को एम्स व डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज संबद्ध अस्पतालों में भर्ती करने का कार्य शुरू हो गया था।
अब भी और अधिक सावधानी बरने की जरूरत
संक्रमण का एक साल का दौर हम सभी ने मिलकर देखा है, बहुत उतार-चढ़ाव रहे है। जिस प्रकार दूसरे राज्यों में कोरोना संक्रमण बढ़ रहा है। उस प्रकार अभी भी हमें और अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है। पात्र लाभार्थी जल्द से जल्द अपना वैक्सीनेश करवाए। खुद, परिवार और अपने समाज को सुरक्षित रखें।
- डॉ. बलवंत मंडा, सीएमएचओ
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