जोधपुर।
निर्यात उद्योग क्षेत्र में पड़ौसी देश चीन अपना एकाधिकार स्थापित करने के लिए पुरजोर कोशिश कर रहा है। चीन से विश्व के अन्य देशों को निर्यात में जबरदस्त उछाल आ रहा है। नतीजतन चीन में खाली कंटेनरों की जबरदस्त मांग है। इससे विश्व के अनेक देश अपने देशों से निर्यात के लिए खाली कंटेनर्स की चुनौती का सामना कर रहे है। चीन ने शिपिंग कंपनियों को भारी भरकम प्रीमियम का भुगतान कर खाली कंटेनर अपने यहां मंगवा लिए है। ज्यादातर खाली कंटेनर चीन जा रहे है। परिणामस्वरूप विश्व बाजार में खाली कंटेनरों की किल्लत हो रही है और भारत भी इससे अछूता नहीं है। लकड़ी के हैण्डीक्राफ्ट व फर्नीचर उत्पादों के निर्यात में प्रमुख जोधपुर भी इस समस्या का सामना कर रहा है।
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पिछले साल फरवरी के मुकाबले 20 फीसदी कम हुआ निर्यात
घरेलू स्तर पर कंटेनरों की किल्लत है, निर्यातकों को कंटेनर के लिए दस दिन से एक माह तक का इंतजार करना पड़ रहा है। यही कारण है कि फ रवरी में जोधपुर का हैण्डीक्राफ्ट निर्यात पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले करीब 20 फ ीसदी कम रहा। निर्यातकों का दावा है कि यदि कंटेनरों की किल्लत न होती तो निर्यात में गिरावट के बजाए करीब पंद्रह फ ीसदी की वृद्धि होती।
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3 से 5 गुना बढ़ गया समुद्री किराया
ओशन फ्रे ट छह माह में इजाफ (डॉलर में)
देश-- पहले फ्र ेट-- अब फ्रेट
जर्मनी-- 1200-- 4500
अमरीका-- 1500-- 3800
यूरोप-- 800-- 2600
इंग्लैंड-- 800-- 2500
सिंगापुर-- 300-- 1500
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कंटेनरों की किल्लत को मैनेज करने में दिक्कत आ रही है। जोधपुर से हर माह करीब 3500 हैण्डीक्राफ्ट कंटेनर में माल निर्यात होता है, अभी सिर्फ 1500-2000 कंटेनर ही मिल पा रहे है। सरकार से घरेलू स्तर पर कंटेनरों की उपलब्धता बढ़ाने का आग्रह किया है।
डॉ भरत दिनेश, अध्यक्ष
जोधपुर हैण्डीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन
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