रेगिस्तान में होने वाले जंगली पौधे से डायबिटीज का इलाज

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जोधपुर.रेगिस्तानी क्षेत्र में होने वाले डोडा पनीर (विथानिया कोगुलेंस) के पौधे से अब डायबिटीज का प्रामाणिक इलाज संभव है। जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के प्राणी शास्त्र विभाग ने पौधे के फूलों में इंसुलिन स्त्रावित को प्रेरित करने वाले यौगिक की खोज की है। इसके फूलों के पानी का सेवन करने से डायबिटीज मेलिट्स रोगियों को दवाइयां के विकल्प के रूप में भविष्य में उपयोगी साबित हो सकता है।

डोडा पनीर भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रेगिस्तानी इलाके में पाए जाने वाला मरुदभिद् पादप है। यह एक झाड़ी है। बरसात के मौसम में इस पौधे में फूल आते हैं। पौधे को बाड़मेर, जैसलमेर और जोधपुर में बकरियां काफी चाव से खाती हैं। ग्रामीण इलाकों में इसके फूलों को सूखाकर रात में पानी में भिगोया जाता है। सुबह इसका पानी पीने का रिवाज है, लेकिन अब जाकर इसके औषधीय गुणों की पुष्टि हुई है।

विथेफैराइन-ए यौगिक बीटा कोशिका को करता है प्रेरित
प्राणी शास्त्र विभाग के शिक्षक डॉ हीराराम और उनके शोधार्थी प्रमोद कुमार ने डोडा पनीर पर रिसर्च किया। जिसमें यौगिकों का विश्लेषण, कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर द्वारा लक्ष्य एंजाइम के साथ बंधुता और चूहे के डायबिटीज मॉडल में क्रमिक अनुसंधान किया। पौधे के फूलों से प्राप्त विभिन्न प्रकार के सत की लखनऊ स्थित केंद्रीय औषधि अनुसंधान प्रयोगशाला में जांच करवाई। इसमें विभिन्न यौगिक पाए गए जो डायबिटीज में फायदा करते हैं। सर्वाधिक लाभ पहुंचाने वाला यौगिक विथेफैराइन-ए मिला जो आंतों में इनक्रेटिन हार्मोन की दक्षता को बढ़ाता है। यही हार्मोन अग्नाशय की बीटा कोशिकाओं से इंसुलिन स्त्रावित करवाता है जो रक्त में ग्लूकोज का नियमन करता है।

सिटाग्लीप्टिन दवाई का विकल्प
वर्तमान में डायबिटीक रोगियों में इनक्रेटिन हार्मोन स्त्रवण के लिए सिटाग्लीप्टिन दवाई दी जाती है जो पहली बार 2006 में सामने आई थी। अगर डोडा पनीर के फूलों का पानी का नियमित सेवन किया जाए तो इस दवाई के विकल्प के रूप में उपयोग किया जा सकता है। वैसे भी दवाइयों के साइड इफैक्ट भी होते हैं।
- डॉ हीराराम, प्राणीशास्त्र विभाग, जेएनवीयू जोधपुर



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