जोधपुर. सोशियल मीडिया पर सस्ते मिल रहे वर्चुअल नम्बर के कारण अपराधी इस तरफ आकर्षित हो रहे हैं। वर्चुअल नम्बर से एक कॉल ५०० से ६०० रुपए में पड़ती है लेकिन बड़े अपराध को अंजाम देने के कारण अपराधियों को यह रकम मामूली लगती है। साथ ही सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ से भी दूर रहते हैं। पिछले कुछ समय से वर्चुअल नम्बर से कॉलिंग कर वारदात को अंजाम देने की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है।
भीतरी शहर में बच्चे की फिरौती के लिए हत्या करने के मामले में पड़ौसी व्यक्ति ने वर्चुअल नम्बर का इस्तेमाल किया था जो वर्तमान में अपराधी और जेलों में बंद शातिर बदमाश कर रहे हैं। वर्तमान में वर्चुअल नम्बर ट्रेस करने का कोई आसान तरीका नहीं है। पुलिस भी एेसे अपराधियों से परेशान रहती है।
क्या होता है वर्चुअल नम्बर
गूगल प्ले सहित अन्य प्ले स्टोर पर वर्चुअल नम्बर उपलब्ध करवाने वाली कई एप्लीकेशन मौजूद है जो प्रति कॉल कुछ पैसा लेकर आपके नम्बर को वर्चुअल नम्बर में बदल देती है लेकिन इसके लिए कॉलिंग का समय बहुत कम मिलता है। अमूमन एक से डेढ़ मिनट के चार्जेज लगते हैं। ये एप व्यक्ति के मोबाइल नम्बर को रेडंमली किसी अन्य नम्बर में बदल देते हैं। स्क्रीन पर यह मोबाइल नम्बर एेसे लगता है जैसे विदेश से किसी ने कॉलिंग की हैं। हर बार कॉलिंग करने पर नम्बर बदल जाता है। एेसे एप और वर्चुअल नम्बर बहुत हैं। एेसे में इसको ट्रेस करना मुश्किल होता है।
लॉरेंस ने भी इस्तेमाल किया था वर्चुअल नम्बर
लॉरेंस ने शुरुआत में २०१५-१६ में व्यवसायियों को धमकाने के लिए दो तीन बार वर्चुअल नम्बर का इस्तेमाल किया था। इसके बाद वह वॉट्सएप कॉलिंग पर उतर आया। वॉट्सएप भी उस समय कॉलिंग के बारे में खुलासा नहीं करता था। उसकी मोबाइल सिम भी फर्जी कागजातों से जारी की गई। जोधपुर थाना पुलिस को सिम कार्ड दिल्ली का मिला। पुलिस जब दिल्ली पहुंची तो वहां यह मोबाइल किसी छोटे बच्चे के नाम से था।
‘वर्चुअल नम्बर ट्रेस करना आसान नहीं है। इसके लिए सभी एप खंगालकर उसके फॉर्मेट मैच करने होते हैं जो आसानी से नहीं होता है। वर्तमान में अपराध जगत में लोग इसका अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं।’
प्रिया सांखला, साइबर एक्सपर्ट
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