जोधपुर. जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग व आईसीएमआर (एनआईआईआरएनसीडी) के संयुक्त तत्वावधान में प्रिवेंशन एंड मैनेजमेंट ऑफ बर्नआउट इन पुलिसिंग विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य पुलिस में लगातार बढ़ते तनाव एवं अवसाद के मामलों में कमी लाने के काम के साथ ही उन्हें रिलेक्सेशन टेक्निक के माध्यम से तनाव मुक्त होकर कार्य करने की तकनीक बताना था।
कार्यशाला में आईसीएमआर के वैज्ञानिक डॉ विकास धिकाव और ड़ॉ पीके आनन्द ने अधिकारियों को तनाव मुक्त रहने के वैज्ञानिक तरीको से अवगत करवाया। राममनोहर लोहिया अस्पताल नई दिल्ली के मेडिसिन विभाग से ड़ॉ. गार्गी बाला ने वर्चुअल माध्यम से मेडिटेशन तकनीक से अवगत करवाया। मनोविज्ञान विभाग के प्रोफेसर एवं कार्यशाला के संयोजक प्रो. एल.एन बुनकर ने अधिकारियों को मनोवैज्ञानिक महत्व के साथ ही पुलिस जांच में काम आने वाले मनोवैज्ञानिक तकनीकों से रूबरू करवाया। सहायक आचार्य डॉ हेमलता जोशी ने रिलैक्सेशन थेरेपी बताई। डॉ अजय त्रिवेदी ने भी संबोधन दिया।
कार्यशाला से विभाग द्वारा किए गए नवाचार के लिए डीसीपी धर्मेन्द्र सिंह, डीसीपी राजेश मीणा, ग्रामीण पुलिस अधीक्षक अनिल कयाल, एडीसीपी ट्रैफिक नाथू सिंह भाटी, एसीपी रविन्द्र बोथरा, एसीपी दरजाराम ने वीडियो सन्देश के माध्यम से सराहा। कार्यशाला ऑफलाइन व ऑनलाइन दोनों मोड़ में आयोजित की गई। ऑफलाइन मॉड में अधिकारियो में एडीसीपी चैनसिंह महेचा, एडीसीपी रघुनाथ गर्ग, एडीसीपी अंजना सुखवाल, सहायक पुलिस आयुक्त राजेन्द्र राठौड़, सुरेश चौधरी, दिनेश डांगी, कैलाश दान सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/3taqMYk
0 comments:
Post a Comment