जोधपुर।
अपने हुनर के दम पर न केवल जोधपुर बल्कि देश-दुनिया में अपनी पहचान बनाई और मुकाम हासिल किया, जोधुपर की चंद्रा गुजर ने। पारंपरिक कशीदाकारी और जूती निर्माण क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने के लिए चंद्रा को राष्ट्रपति अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है। अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सोमवार को पीएचडी चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री की ओर से चन्द्रा को उत्कृष्टता सम्मान से सम्मानित किया गया । कोरोना के कारण वर्चुअल कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनुसुइया उइके व सांसद मेनका ने गांधी चन्द्रा को सम्मानित किया
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दूसरी तक पढ़ाई की
करीब 64 वर्षीय चंद्रा केवल साक्षर है और दूसरी कक्षा तक पढ़ाई है। चंद्रा को यह कला विरासत में मिली है। करीब 10 साल की उम्र में सिर से पिता का साया उठ गया। पारंपरिक जूती निर्माण करने वाले परिवार में अकेली मां का तीन भाई-बहनों के परिवार का गुजर-बसर करना पहाड़ जैसी समस्या से कम नहीं था। विकट परिस्थिति में उनकी मां ने तीनों बच्चों को पारंपरिक जूती बनाना और कशीदाकारी का काम सिखाया। इन्हीं बच्चों में चंद्रा ने अपने इसी हुनर के दम ऊंचाइयां छुई और नाम कमाया।
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पुत्र भी राष्ट्रपति से हो चुके है सम्मानित
चंद्रा ने बताया कि साधारण जूती-मोजड़ी की एक जोड़ी एक दिन में तैयार कर लेती है, जबकि विशेष कारीगरीयुक्त जोड़ी बनाने में 2 से 3 माह का समय लग जाता है। चंद्रा ने कशीदाकारी और जूती निर्माण की बारीकियां अपने बेटे-बेटी को भी सिखाई, इनके पुत्र को भारत सरकार के हस्तशिल्प विकास आयुक्त कार्यालय की ओर से राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।
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हस्तियां रही है मुरीद
चंद्रा की कारीगरी की कई हस्तियां मुरीद है। जिनमें जोधपुर का राजपरिवार, ब्रिटेन के प्रिंस चाल्र्स, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम व कई राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल है। चंद्रा ने दिल्ली सहित देशभर में आयोजित हस्तशिल्प मेलों में अपनी कला का प्रदर्शन किया है और पुरस्कारों से सम्मानित हुई है।
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