शहीद लक्ष्मण को पुष्पांजलि देने उमड़े ग्रामीण

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बिलाड़ा (जोधपुर). राजौरी पुंछ की सरहद पर दुश्मनों के साथ लोहा लेते शहीद हुए खेजड़ला के वीर लक्ष्मण चौधरी को यहां मोती सिंह स्टेडियम में सैकड़ों नर-नारियों ने पुष्पांजलि अर्पित की।

वहीं देश के नामवर कवियों ने देशभक्ति से ओत प्रोत रचनाएं प्रस्तुत की। जिस समय शहीद के माता- पिता का अभिनंदन किया गया तो संपूर्ण वातावरण वंदे मातरम, भारत माता की जय तथा शहीद लक्ष्मण चौधरी अमर रहे के नारों से गूंज उठा।

सामाजिक कार्यों में अग्रणी जय श्रीकृष्ण मानव हितार्थ सेवा संस्थान के सदस्यों द्वारा आयोजित शहीद को पुष्पांजलि अर्पित करने एवं एक शाम शहीद के नाम से सोमवार किए गए आयोजन में आयोजकों की उम्मीद से कई गुना अधिक लोग उमड़ पड़े तथा 36 बीघा का स्टेडियम खचाखच भर गया। जब भी कोई कवि देशभक्ति की रचना सुनाता उस दौरान गगनभेदी नारों से वातावरण गूंज उठता।

पिता ने शहीद पुत्र को किया सैल्यूट
प्रारंभ में शहीद के पिता किसनाराम पिचकिया एवं माता ने जब शहीद के आदम कद चित्र के सामने दीप प्रज्वलित किया, उस समय लोगों के द्वारा लगाए गए शहीद अमर रहे के नारों को दूर-दूर तक लोगों ने सुना। राष्ट्रभक्ति के इस वातावरण को देख पिता ने अपने शहीद बेटे को सैल्यूट किया तो मां फफक कर रो पड़ी। इस स्थिति को पालिकाध्यक्ष रूप सिंह परिहार एवं उनकी पत्नी देवी ने संभाला और दोनों को अपने पास बिठाया। यहां खेजड़ला के सरपंच एवं उनके साथ आए अनेकों नवयुवक भी मौजूद रहे।

अब हम तो सफऱ करते हैं
सीनियर सैकंडरी विद्यालय के एनसीसी कैडेट जब मातमी धुन के साथ प्रतीकात्मक रूप से तिरंगे में लिपटे शहीद के शव का बॉक्स लेकर मार्चपास्ट के साथ मंच की ओर बढ़ रहे थे, तो पूरा वातावरण स्तब्ध रह गया। सभी ने खड़े होकर अश्रुपूरित पुष्प वर्षा कर श्रद्धांजलि अर्पित की। मंच पर तिरंगे में लिपटे बॉक्स को पुलिस उप अधीक्षक हेमंत नोगिया ने टेबल पर रखवाया तथा पुलिस जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया और वातावरण फिर एक बार अमर शहीद जिंदाबाद के नारों से गूंज उठा। उसी समय पाŸव में ए मेरे वतन के लोगों जरा आंख में भर लो पानी का गीत बज उठा।

जान देने की रुत रोज आती नहीं
आवाज के जादूगर ओम आचार्य द्वारा दी गई प्रस्तुतियां और शहीद की शान में सुनाए गए स्लोगनों के दौरान जमकर जयकारे लगाए गए। वही देश के प्रसिद्ध कवि दिनेश राणा, रमेश माली, दिलीप गवैया, गजेंद्र राव, काजल वैष्णव और ओम मुंडेल द्वारा देशभक्ति के गीत, कविताओं से श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा और भोर कब हो गई मालूम ही नहीं पड़ा। प्रस्तुतियों के दौरान जिंदा रहने के मौसम बहुत है लेकिन जान देने की रुत रोज आती नहीं के गीत को जगदीश प्रजापत ने शहीद फिल्म में फिल्माए गए दृश्य को अपने अभिनय से जीवंत कर दिया।

सौ फीट ऊंचा फहरेगा तिरंगा
वीर सपूत लक्ष्मण की शान में यह आयोजन कराने वाली संस्था के अध्यक्ष रामकिशोर छीपा, सचिव सुमित टाक, कोषाध्यक्ष भागीरथ सोनी, पूर्व अध्यक्ष अरुण सोनी, जगदीश प्रजापत, संरक्षक मंडल के महेंद्रसिंह राठौड़, भंवरलाल सांगर, बाबूभाई पटेल एवं उनके साथियों ने इच्छा जाहिर की कि संस्था शहीद की अमर गाथा को यादगार बनाने के लिए कस्बे के किसी एक स्थान पर करीब सौ फीट ऊंचाई पर तिरंगा स्थाई तौर पर फ़हरे इसके लिए स्थान चाहिए । उसी दौरान पालिकाध्यक्ष रूपसिंह परिहार ने आश्वस्त किया कि नियमानुसार इस कार्य को 15 अगस्त से पहले व्यावहारिक रूप दे दिया जाएगा।



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