जोधपुर. ज्ञान व वाणी की अधिष्ठात्री मां सरस्वती का प्राकट्य दिवस बसंत पंचमी सूर्यनगरी में मंगलवार को श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाया जाएगा। प्रकृति के उत्सव पर संगीत साधना से जुड़े साधक वीणा वादिनी के साथ वाद्ययंत्रों का पूजन करेंगे। मंदिरों में वासंती पोशाकों से शृंगारित देव प्रतिमाओं को पीले चावल (बीणज), केसर खीर और पीले फलों का भोग लगाया जाएगा।
बसंत पंचमी को पीले वस्त्र व पीली धातुओं का दान फलदायी बताया गया है। सनातन धर्म की परम्परा के तहत विद्या अध्ययन आरम्भ करने के लिए पाटी पूजा भी होगी ।
१९ फीट ऊंची प्रतिमा का महापूजन
कायलाना रोड स्थित संबोधि धाम में मंगलवार सुबह संत चन्द्रप्रभ व ललितप्रभ के सान्निध्य में १९ फीट ऊंची सरस्वती प्रतिमा का महापूजन किया जाएगा। सरस्वती माता की नयनाभिराम विशाल प्रतिमा वर्ष 2007 में संबोधि धाम में स्थापित की गई थी। प्रतिमा का आकार कमलासन सहित 19 फुट है । हर वर्ष बसंत पंचमी को शहर के श्रद्धालु प्रतिमा का महा अभिषेक और अष्ट प्रकारी पूजन करते हैं।
अमृत सिद्धि और रवि योग संयोग
वसंत पंचमी पर दो विशेष योग बन रहे है। ग्रहों की चाल भी इस दिन को उत्तम बनाने में सहयोग कर रही है। ज्योतिष शास्त्रियों के अनुसार इस दिन अमृत सिद्धि योग और रवि योग का संयोग बन रहा है, जो इस पर्व के महत्व को
अधिक बढ़ाता है । इस बार वसंत पंचमी पर रेवती नक्षत्र रहेगा, जो कि बुध का नक्षत्र माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को बुद्धि और ज्ञान का कारक माना गया है।
पीले रंग का महत्व
वसंत पंचमी पर पीला रंग उत्साह और उल्लास का रंग माना गया है। माना जाता है कि वसंत ऋतु में धरती की उर्वरा शक्ति में वृद्धि होती है। सरसों की फसल से धरती पीली नजर आने लगती है, जो लोगों को आनंद प्रदान करती है। इसीलिए वसंत ऋतु श्रेष्ठ मानी जाती है। पीले रंग के प्रयोग से दिमाग की सक्रियता बढ़ती है। इसलिए इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व माना गया है। वसंत पंचमी पर्व मां सरस्वती का पूजन भोर के समय सुबह 3.36 से आरम्भ होकर पूरे दिन रहेगा।
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