जोधपुर।
कोरोना की मार झेल रहे देश के उद्योगों को निर्यात संबंधी नई चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। देश से हैण्डीक्राफ्ट व अन्य उत्पादों का निर्यात करना महंगा होता जा रहा है। इसकी वजह कच्चे माल से लेकर ट्रांसपोर्ट तक सब महंगा होना है। इससे विदेशी मुद्रा अर्जन में मुख्य भूमिका निभाने वाला जोधपुर के हैण्डीक्राफ्ट उद्योग की परेशानी बढ़ती जा रही है।यहां के निर्यातकों के पास ऑडर्स होने के बावजूद वे अपने ऑर्डर पूरे नहीं कर पा रहे है । उत्पाद के निर्माण में काम आने वाले कच्चे माल से लेकर ट्रांसपोर्ट तक सभी दामों में भारी इजाफा हो गया है। इस कारण हैण्डीक्राफ्ट प्रोडक्ट की मेन्यूफेक्चरिंग कोस्ट बढ़ गई है ।
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क्या है कांट्रेक्ट रेट
जोधपुर के कई हैण्डीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स ने आगामी कई महिनों तक के ऑडर्स कांट्रेक्ट रेट पर विदेशी बायर्स से ले रखे है। कांट्रेक्ट रेट का मतलब है कि ऑर्डर देते समय बायर रेट तय कर लेता है। कांट्रेक्ट रेट पर ऑर्डर लेने के कारण यहां के एक्सपोर्टर्स बीच में रेट नहीं बढ़ा सकते। एेसे में कोई भी विदेशी बायर जोधपुर के हैण्डीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स के शिपमेंट रेट बढ़ाने को तैयार नहीं है। इससे निर्यातक असमंजस की स्थिति में है ।
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लॉकडाउन खुलने के बाद ज्यादा हो गए दाम
लॉकडाउन खुलने के बाद से ही हैण्डीक्राफ्ट में काम आने वाले कच्चे माल, लकड़ी, लोहा, ब्रास, फ ाइबर, पॉलिश, केमिकल, टूल, पैकिंग मेटिरियल आदि के दामों में 20 से 40 प्रतिशत तक की बढो़तरी हो गई है। इससे उत्पादन लागत में करीब 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो गई है। एक्सपोर्टर्स पर अपने माल को एक्सपोर्ट करने के लिए खाली कंटेनरों की कमी भी एक बड़ा संकट है, जिसके कारण कंटेनर बुकिंग व ट्रांसपोर्टेशन के दामों में भी भारी वृद्धि हो गई है।
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एक्सपोर्ट ग्रोथ पर विपरीत असर
जोधपुर हैण्डीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन अध्यक्ष डॉ भरत दिनेश ने बताया कि लकड़ी, कच्चे माल के भावों में वृद्धि, कंटेनर्स की कीमतों में बढ़ोतरी का भार है। प्रोत्साहन रूपी एमइआइएस स्कीम भी बंद हो चुकी है । इससे निर्यातकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है । ऐसे में हैण्डीक्राफ्ट एक्सपोर्ट की ग्रोथ पर विपरीत असर पड़ रहा है ।
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