जोधपुर. महाराजा उम्मेदसिंह ने अपने राज्य में किसानों को सिंचाई की सुविधा प्रदान करने में कभी कोई कसर बाकी नहीं रखी थी । वर्ष1938 में 29 अप्रेल को सुमेर समंद ( हेमावास बांध ) से नहर निकाल कर उसका उद्घाटनकिया गया । वर्ष 1940 में सुमेर समंद के बांये व दांये भाग के किनारों को ऊंचा करने के राशि की तत्काल मंजूरी दी । सुमेर समन्द से लाई गई नहर के उद्घाटन अवसर पर तत्कालीन पीडब्ल्यूडी के सचिव भोपालचन्द लोढ़ा को उनकी कार्य - कुशलता के फलस्वरूप व्यक्तिगत सनद प्रदान की एवं साथ में पैर में सोना पहनने का इनाम दिया। जोधपुर महाराजा भोपालचन्द लोढ़ा को अल्लादीन का चिराग कहा करते थे। क्योंकि उनकी नजरों में लोढ़ा किसी भी कार्य को करने में सक्षम थे । जब उनका सम्मान किया गया तो महाराजा उम्मेदसिंह के साथ तत्कालीन पीडब्ल्यूडी मिनिस्टर एसजी एडगर भी मौजूद रहे। उम्मेदसागर बान्ध के लिए तो महाराजा ने राज्य के बजट में से एक लाख रुपये तथा निजी कोष से दो लाख रुपये देने की घोषणा की थी। उन्हीं के कार्यकाल में जोधपुर और पाली में पीने के पानी की समस्या के निवारण के लिए जवाई बांध की महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी मिली थी।
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