मारवाड़ रत्न लाखा खां को मिला पद्मश्री अवार्ड

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जोधपुर. सिंधी सारंगी के निर्विवाद गुरु ७१ वर्षीय लाखा खान को संगीत कला क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए पद्मश्री अवार्ड मिला है। जोधपुर जिले के बाप तहसील के रनेरी गांव में मंगणियार समुदाय के पारंपरिक संगीतकारों के परिवार में जन्में लाखा खान को कम उम्र में ही उनके पिता थारू खान ने और बाद में उनके चाचा मोहम्मद खान ने मंगणियारों के मुल्तान स्कूल की रचनाओं का प्रशिक्षण दिया। संगीत के क्षेत्र में उनका सार्वजनिक प्रदर्शन 60 और 70 के दशक के उत्तरार्ध में शुरू हुआ। लोक कला मर्मज्ञ कोमल कोठारी के मार्गदर्शन में 90 के दशक में यूरोप, ब्रिटेन, रूस और जापान सहित विश्व के कई देशों में अपनी कला का प्रदर्शन कर श्रोताओं का दिल जीता। उन्होंने 2013 में अपना पहला अमेरिकी टूर किया।

प्यालेदार सिंधी सांरगी बजाने वाले एकमात्र कलाकार
लाखा खान मांगणियार समुदाय में प्यालेदार सिंधी सांरगी बजाने वाले एकमात्र कलाकार बचे हैं । वर्तमान में अपनी अगली पीढी को इस कला में पारंगत कर रहे हैं। हिन्दी, मारवाड़ी, सिंधी, पंजाबी और मुल्तानी सहित छह भाषाओं में गाने वाले लखा खान को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित देश विदेश में कई बार पुरस्कृत किया जा चुका है। लाखा खान ने जटिल वाद्ययंत्र सिंधी सारंगी में महारत हासिल की और राजस्थानी लोक और सूफ ी संगीत की सदियों पुरानी संगीत परंपरा को आगे बढ़ाया। उन्होंने राजस्थान और भारत के विभिन्न राज्यों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यूएस और यूरोप में कई बार अपनी संगीत कला का प्रदर्शन किया है।

२०१७ में मिला था मारवाड़ रत्न
लाखा खान को वर्ष २०१७ में जोधपुर स्थापना दिवस पर मेहरानगढ़ में आयोजित समारोह के दौरान मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट के संरक्षक गजसिंह की ओर से मारवाड़ रत्न पुरस्कार से नवाजा गया था। राजस्थानी लोक संगीत के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए मारवाड़ रत्न के तहत उन्हें महाराजा विजयसिंह सम्मान प्रदान किया गया। इससे पूर्व वर्ष 2001-02 के लिए राजस्थान संगीत नाटक अकादमी जोधपुर की ओर से लोक संगीत - सारंगी के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से सम्मानित किया गया। जुलाई 2009 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल की ओर से संगीत नाटक अकादमी अवार्ड वर्ष 2008 से सम्मानित किया गया। उन्होंने विभिन्न प्रसिद्ध कलाकारों यथा पद्म भूषण जाकिर हुसैन (तबला वादक) , पद्म भूषण उस्ताद सुल्तान खान (सारंगी वादक), पद्म भूषण विश्व मोहन भट्ट ( मोहन वीणा वादक) , पद्मश्री साकरखां ( कमायचा वादक) एवं पंडित कृष्णमोहन भट्ट (सितार वादक) सहित कई अन्य प्रसिद्ध कलाकारों के साथ अपनी कला का प्रदर्शन किया है ।



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