बाल विवाह रोकथाम में मासूमों की सारथी : डॉ. कृति भारती

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जोधपुर . सूर्यनगरी के सारथी ट्रस्ट की मैनेजिंग ट्रस्टी एवं पुनर्वास मनोवैज्ञानिक डॉ.कृति भारती ने खुद की जिंदगी में कडे संघर्षों की जद्दोजहद से उबरी। इसके बाद अपना जीवन मासूमों को समर्पित कर दिया। हर दिन जानलेवा धमकियों की परवाह किए बिना मासूमों को रूढीवादी प्रथा बाल विवाह की बेडियों से कानूनन मुक्ति दिला रही है। जिससे बाल विवाह पीडितों की जिंदगी में खोई मुस्कान लौट पा रही है।

हौंसलों की उडनपरी व मुक्तिदाता छोरी नाम से मशहूर
32 वर्षीय डॉ.कृति भारती ने अनूठी साहसिक मुहिम पर चलकर वर्ष 2012 में देश का पहला बाल विवाह निरस्त करवाया था। हर दिन जानलेवा धमकियों व कई हमलों से घबराए बिना अब तक 41 जोडों के कानूनन बाल विवाह निरस्त करवा चुकी हैं। इसके अलावा अब तक 1400 से अधिक बाल विवाह रूकवाए हैं।

बचपन में संघर्ष, जहर भी खिला दिया
डॉ.कृति भारती के दुनिया में आंखें खोलने से पहले ही डॉक्टर पिता ने मां-बेटी का परित्याग कर दिया। इनकी सिंगल पैरेंट माता ने पालन-पोषण किया। रिश्तेदारों के ताने और शोषण सहे। करीब दस साल की उम्र में कृति को किसी ने कोई धीमा जहर खिला दिया। जिससे लाचार अंग करीब दो साल बाद रैकी चिकित्सा से ठीक हुए।

सरनेम बदल भारत की बेटी बनीं
12 साल की उम्र में कृति ने पहला क्रांतिकारी कदम उठाकर पिता का सरनेम हटा खुद का नया सरनेम भारती यानिकि भारत की बेटी रख दिया। ठीक होने पर ओपन बोर्ड से चौथी कक्षा से सीधे दसवीं कक्षा उत्तीर्ण की। अब तक मनोविज्ञान में पीएचडी और बाल संरक्षण एवं कई कानूनी डिग्रियां भी ले चुकी है।

बाल विवाह मुक्ति की सारथी, कई रिकॉर्ड बनाए
वर्ष 2011-12 में डॉ.कृति ने जोधपुर में सारथी ट्रस्ट की स्थापना की। वर्ष 2012 में देश का पहला बाल विवाह निरस्त करवाया। अब तक डॉ.कृति ने जानलेवा व बलात्कार तक की धमकियों और हमलों के बावजूद कानूनन 41 जोडों के बाल विवाह निरस्त करवाए हैं। इसके अलावा 1400 से अधिक बाल विवाह रूकवाए हैं। डॉ.कृति भारती का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉड्र्स और वल्र्ड रिकॉड्र्स इंडिया सहित कई रिकॉड्र्स में शामिल किया गया। बाल विवाह निरस्त की मुहिम को सीबीएसई पाठ्यक्रम में भी शामिल किया गया। वहीं 20,000 से अधिक ग्रामीणों व विद्यार्थियों को बाल विवाह निरस्त व रोकथाम की शपथ दिलवाई है। कृति ने अब तक करीब 7000 बच्चों और 6000 महिलाओं को पुनर्वासित भी किया है।

सैंकडों बेटियों की दीदी व मां, डांस से मिलती उर्जा
डॉ.कृति अब तक सैंकडों बेटियों की मां और दीदी बनी हुई है। बचपन से आंतरिक तौर पर डांस से जुडाव रहा है। डांस को उर्जा प्राप्ति का स्रोत मानती है। बालिका वधुओं को भी मानसिक तनाव मुक्ति के लिए डांस के अलावा अन्य कौषल से जोडती है। वहीं बालिका वधुओं को जहां तक पढी हो, उसके आगे की पढाई चालू करवाकर पढाई से जोडने का भी मिशन चला रखा है।

वल्र्ड टॉप टेन एक्टिविस्ट
डॉ.कृति भारती को यूएसए की टेफ्ड मैग्जीन की ओर से वल्र्ड टॉप टेन एक्टिविस्ट की सूची में शामिल किया गया। बीबीसी हिन्दी की ओर से वर्ष 2015 में 100 प्रभावशाली महिलाओं की सूची में शामिल किया गया। थॉमसन रॉयटर फाउंडेशन लंदन की ओर से विशेष फैलोशिप सम्मान,कोलम्बो में सम्मान, गल्र्स नॉट ब्राइड्स की ओर से चेंज मेकर अलंकरण, एक्ट्रेस प्रियंका चौपड़ा से सम्मान, जी टीवी के रियलिटी शो में रियल हीरो अवार्ड, मारवाड रत्न व मेवाड रत्न सहित कई राष्ट्रीय व अन्तरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं।

रूढीवादी परम्परा मिटाकर बदलाव की साहसिक यात्रा
डॉ.कृति बाल विवाह की सदियों पुरानी रूढीवादी प्रथा के खिलाफ काम कर बदलाव ला रही है। उनके प्रयासों से जहां राजस्थान सर्वाधिक बाल विवाह के कारण बदनाम रहा, वहीं पर अब तक देष के सर्वाधिक 41 बाल विवाह कृति ने निरस्त करवाए । जिससे बाल विवाह पीडि़तों को बाल विवाह की बेडिय़ां तोड़कर उन्हें आजादी दिला रही है।

खुुद के संघर्ष सहकर, दूसरों को न्याय दिलाने में जुटी
डॉ.कृति बताती है कि इस धरती पर आंख खोलने से पहले से ही मेरा जीवन संघर्षमय हो चुका था। शोषण की परिभाषा उस समय पढ़ ली थी जब मैंने वर्णमाला भी नहीं सीखी थी। इस क्षेत्र को मैंने नहीं चुना बल्कि इस क्षेत्र ने मुझे अपने योद्धा के रूप में चुना है। हर पीडि़त को बचाते हुए मुझे हमेशा एहसास हुआ कि मैंने खुद को बचाया है।

शोषण का नामों निशां ना बचे
डॉ.कृति का मानना है कि गणतंत्र तभी मजबूत होगा जब सभी के अधिकारों की रक्षा होगी और सभी शोषण मुक्त आकाश में उड़ान भरेंगे। कोई भी देश तब विकसित राष्ट्र बन सकता है जब उस देश की महिलाएं और बच्चे शोषण मुक्त हो। वे बताती है कि बालिकाओं और बच्चों को बाल विवाह की बेडिय़ों से मुक्ति दिलाकर बाल विवाह के शोषण से मुक्त करके उनका बाल विवाह निरस्त करके मैं उन्हें एक ऐसा नया जीवन देने का प्रयास कर रही हूं जहां शोषण का नामोनिशान ना हो। देश से बाल विवाह का अभिशाप तभी मिटेगा जब बाल विवाह केवल किताबों में दिखाई देगा। असलियत में न कोई बाल विवाह हो और ना ही कोई बाल विवाह पीडि़त दिखे।



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