नारी निकेतनों व बालिका गृहों मेंं स्मार्ट टेलीविजन स्क्रीन लगाएं: कोर्ट

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जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य के सभी नारी निकेतनों, बालिका गृहों तथा संप्रेषण गृहों में स्मार्ट टेलीविजन स्क्रीन लगाने के निर्देश दिए हैं, ताकि वहां निरुद्ध महिलाओं और बच्चों को उम्र के हिसाब से प्री-रिकोर्डेड कोर्सेज के माध्यम से कौशल उन्नयत शिक्षा दी जा सके।
न्यायाधीश संदीप मेहता तथा देवेन्द्र कछवाहा की खंडपीठ में एक याचिका की सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता सुनील बेनीवाल ने कहा कि राज्य के सभी नारी निकेतनों, बालिका गृहों तथा संप्रेषण गृहों में ओपन एयर जिम स्थापित करने की कार्यवाही की जा रही है। अगले दो महीनों में इसकी संपूर्ण पालना कर दी जाएगी। ऐसे संस्थानों में निरुद्ध महिलाओं और बच्चों को कौशल उन्नयन शिक्षा देने के लिए अब तक ठोस कदम नहीं उठाए जाने के मामले में न्याय मित्र नुपूर भाटी ने एक सुझाव दिया कि ऐसे संस्थानों में स्मार्ट टेलीविजन स्क्रीन स्थापित की जा सकती है, जहां प्री-रिकॉर्डेड कोर्सेज से कौशल शिक्षा दी जा सकती है। इससे प्रशिक्षक की मौजूदगी सुनिश्चित करने की आवश्यकता नहीं रहेगी। खंडपीठ ने इसे उपयोगी सुझाव मानते हुए सभी अतिरिक्त महाधिवक्ताओं को स्मार्ट टेलीविजन स्क्रीन स्थापित करने को कहा है। अतिरिक्त महाधिवक्ता फरजंद अली ने कहा कि शिक्षा विभाग ने स्माइल प्रोजेक्ट के तहत ऐसे प्री-रिकॉर्डेड कोर्स तैयार किए हैं, जिन्हें आसानी से ऐसे संस्थानों में दिखाया जा सकता है। अतिरिक्त महाधिवक्ता पंकज शर्मा और मनीष व्यास ने कहा कि कोर्ट के आदेश की पालना में ऐसे संस्थानों में चिकित्सा विशेषज्ञों की विजिट को बढ़ा दिया गया है। उन्होंने इन संस्थानों में रिक्त पद भरने की पालना रिपोर्ट पेश करने के लिए अंतिम अवसर मांगा, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। अगली सुनवाई 15 मार्च को होगी।



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