जोधपुर. आर्मी की 10 पैरा यूनिट की हेलो कास्टिंग एक्सरसाइज के दौरान तख्त सागर में उतरे कमांडो को रेस्क्यू करने के लिए आर्मी ने मोटर बोट का भी प्रबंध किया था। आर्मी सूत्रों के अनुसार जिस वक्त हेलीकॉप्टर की रस्सी से 3 जवान ऊपर चढ़ गए थे और अंकित पीछे रह गए, उस समय मोटर बोट को इशारा मिलने पर वह अंकित की रेस्क्यू के लिए रवाना हुई लेकिन वह तख्त सागर के अंदर मछली के जाल में फंस गई। काफी मशक्कत करने के बाद भी मोटर बोट जाल से बाहर नहीं आई, तब तक काफी देर हो चुकी थी। उधर अंकित गुप्ता के गुरुवार दिन भर नहीं मिलने के बाद सेना के द्वारा मुख्यालय को सूचना दी गई तब गुरुवार रात को ही दिल्ली से नेवी के मार्कोस कमांडो रवाना किए गए। मार्कोस कमांडो ने शुक्रवार को अपने उपकरणों के साथ तख्तसागर में अंकित की तलाश की। शाम तक वह भी कामयाब नहीं हुए। मार्कोस इंडियन नेवी के मरीन कमांडो है जो समुद्र और पानी के विषम परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रशिक्षित होते हैं।
हेलो कास्टिंग एक्सरसाइज के दौरान आर्मी के पास दो-तीन मोटर बोट थी। एक बोट को एयरफोर्स के रूद्र हेलीकॉप्टर के जरिए सीधा तख्तसागर में गिराया गया। पानी में बचाव कार्य करने के बाद हेलीकॉप्टर से रस्सी के जरिए ऊपर आ रहे जवानों को करीब 25 फीट दूर खड़ी एक मोटर बोट नजर रख रही थी। बोट में बैठे जवान रस्सी से ऊपर आ रहे कमांडो और हेलीकॉप्टर के पायलट को इशारों में बातें भी कर रहे थे। जब 3 जवान हेलीकॉप्टर की रस्सी से चढ़ गए और अंकित गुप्ता पीछे रह गए तब बोट रवाना की गई लेकिन कुछ ही दूरी पर वह मछली के जाल में फंस गई। उसे निकलने के लिए काफी समय लग गया।
गौरतलब है कि तख्तसागर में मछली पालन का ठेका दिया जाता है। यहां कई प्रकार की मछलियों की प्रजातियां हैं जिन्हें स्थानीय बाजार में बेचा जाता है।
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