जोधपुर।
वैश्विक कोरोना महामारी के दौरान लाखों लोगों के हाथों से रोजगार निकल गए व अधिकांश को अब तक बेरोजगारी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों अपने गांव-शहर की ओर आ गए, जहां भी रोजगार की समस्या थी। ऐसे में लोगों का रुझान पारंपरिक रोजगार के साधनों की ओर बढ़ा। नए साल में एग्रो प्रोसेसिंग (कृषि प्रसंस्करण) रोजगार के नए विकल्प के रूप में सामने आया है। केन्द्र सरकार की ओर से भी कृषि में आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए आत्मनिर्भर पैकेज की घोषणा की गई है। आत्मनिर्भर पैकेज एग्रो प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने व किसानों को फ सलों का उचित मूल्य दिलाने में सहायक होगा। आत्मनिर्भर पैकेज से कृषि क्षेत्र के विकास में तेजी की सम्भावना है। वहीं प्रवासी लोगों के शहरों से गांवों में लौटने से नए स्टार्टअप भी शुरू होने की सम्भावना जगी है। इससे किसानों की आमदनी दुगुनी करने का लक्ष्य पूरा होने के साथ आमदनी भी बढ़ेगी। देश की अर्थव्यवस्था को एग्रो प्रोसेसिंग व आत्मनिर्भर पैकेज से कृषि का आधारभूत ढांचा मजबूत होने से सहारा मिलेगा।
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एफपीओ बनाने की घोषणा
आत्मनिर्भर पैकेज कृषक उत्पादक समूह (एफपीओ), प्राथमिक सहकारी समितियों के द्वारा फ सल उत्पादन लागत कम करने, कृषि उपकरण सुलभ करवाने, फ सलों की प्रोसेसिंग व भण्डारण करके विपणन में मदद व प्रोत्साहन में खर्च किया जाएगा। केंद्र सरकार देश में एफपीओ बनाने की घोषणा कर चुकी है। इन उत्पादक समूहों को कृषि आदान उत्पादन व विक्रय, फ सल प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने, फ सल भंडारण के लिए वेयरहाउस हाउस, कोल्ड स्टोरेज, फ सल उत्पादों की ब्रांडिंग, निर्यात के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराएगी, जिससे कृषि के आधारभूत ढांचागत विकास में मदद मिलेगी।
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आत्मनिर्भर पैकेज के तहत कृषि के आधारभूत ढांचे को मजबूती मिलेगी, एग्रो प्रोसेसिंग व भण्डारण से फ सलों का उचित मूल्य प्राप्त हो सकेगा। किसानों की आय व क्रय शक्ति बढ़ेगी, जो देश की अर्थव्यवस्था को सहारा देगी।
तुलछाराम सिंवर, प्रांत प्रचार प्रमुख
भारतीय किसान संघ जोधपुर
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