आगोलाई/जोधपुर. देश-प्रदेश की सरकारें विकास के बड़े-बड़े दावे करती हैं, लेकिन आजादी के सात दशक बीत जाने के बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों में कई ऐसे गांव-ढ़ाणियां हैं जिन्हे आज भी मूलभूत बुनियादी सुविधाओं के अभाव गुजारा करना पड़ रहा हैं जो प्रशासन के विकास के दावों को मुंह चिढ़ा रहा हैं । प्राप्त जानकारी अनुसार क्षेत्र की भाटेलाई पुरोहितान ग्राम पंचायत मुख्यालय से थोड़ी दूरी पर स्थित जोगियों के करीब तीस घरों को आज इस डिजीटल युग में भी रोशनी का इंतजार हैं । सामाजिक कार्यकर्ता सतीश सिंह राजपुरोहित अनुसार आजादी से कई दशक पहले बसे जोगियों के वर्तमान में दो दर्जन से अधिक परिवार व दो सौ के करीब जनसंख्या स्वयं की खातेदारी जमीन में निवास करती हैं । इन परिवारों ने रोशनी के लिए कई बार फाइले भरी, क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से मांग की लेकिन अभी तक इंतजार ही हैं । यहां रह रहे ग्रामीणों ने बताया कि चुनावों के समय लोग बहुत बड़े-बड़े वादे करके वोट ले जाते फिर बाद में कोई वापस नही संभालता । जबकि दो-तीन साल क्षेत्र दीनदयाल ग्रामीण विद्युतिकरण योजना के तहत गांव-गांव, ढ़ाणी-ढ़ाणी खम्भे लगाकर कनेक्शन दिए जाते थे उस समय कनेक्शन लेने की कोशिश की लेकिन जानकारी के अभाव कुछ नही हो पाया और ना ही किसी ने हमारी सुध ली । मजबूरी में आज भी ये परिवार चिमनी, मोमबत्ती सहित रोशनी के अन्य वैकल्पिक माध्यमों पर निर्भर रहना पड़ रहा हैं । इनका कहना हैं :- दीनदयाल ग्रामीण विद्युतिकरण योजना बंद हो चुकी हैं । ऐसी कोई योजना आएंगी तो जरूर कनेक्शन उपलब्ध कराए जाएंगे । वर्तमान समय में ढ़ाणियों में बिना पोल के कनेक्शन विभाग द्वारा अविलम्ब जारी किए जाते हैं और जहां पर पोल की आवश्यकता हैं उनके लिए कोई नई स्कीम आने पर ही कनेक्शन जारी होगें :- कालूराम परमार, सहायक अभियंता बालेसर ।
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