70 लाख खर्च होने के बाद भी देवताओं की साळ का कार्य अधूरा

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जोधपुर. ऐतिहासिक मंडोर उद्यान में स्थित देवताओं की साळ में जर्जर मारवाड़ के वीरों, लोकदेवता और विभिन्न देवी देवताओं की विशालकाय प्रतिमाओं का समूह अब दर्शनार्थियों व पर्यटकों को नए स्वरूप में नजर आएगा। प्रतिमाओं की मरम्मत और जीर्णोद्धार के लिए राज्य सरकार ने 70 लाख बजट जारी किया था। बजट घोषणा के अनुरूप देवताओं की साल के जर्जर छज्जे, सुरक्षा दीवार और प्रतिमाओं का जीर्णोद्धार कर नया स्वरूप प्रदान किया गया। लेकिन अभी तक देवताओं की साळ में लाइटें और पारदर्शी कांच लगाने का कार्य अधूरा पड़ा है। पुरातत्व विभाग के जोधपुर वृत्त अधिकारी सेवानिवृत्त होने और मंडोर संग्रहालय के प्रभारी को पाली का अतिरिक्त दायित्व देने के कारण काम आगे नहीं बढ़ सका है। लंबे अर्से से देवताओं और वीरों की प्रतिमाएं सीलन के कारण जगह जगह से उखड़ गई थी।

जीर्णोद्धार के दौरान यथा स्थिति का प्रयास किया गया लेकिन मूर्तियों के स्वरूप में काफी बदलाव हुआ है। जोधपुर के महाराजा अजीतसिंह और महाराजा अभयसिंह के शासनकाल में सन 1707 से 1749 के मध्य निर्मित मूर्तियों में 7 देवताओं और 9 मारवाड़ के वीर पुरूषों की प्रतिमाएं शामिल है। करीब पंद्रह फ ीट ऊंची मूर्तियां मारवाड़वासियों की श्रद्धा का केन्द्र भी है।

अभी काम बाकी

देवताओं की साळ परिसर में पक्षियों के प्रवेश और मिट्टी को रोकने के लिए 15 एमएम का कांच तथा लाइटें लगाने का कार्य बाकी है। विभाग के जोधपुर वृत्त अधीक्षक सेवानिवृत्त होने के कारण काम शेष रह गया जिसे जल्द ही पूरा किया जाएगा। महेन्द्र कुमावत , परिरक्षक, मंडोर पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग

देवताओं की साळ में यह है मूर्तियां

देवताओं की साल में राठौड़ों की इष्ट देवी और परिहारों (ईंदों) की कुलदेवी मां चामुण्डा, महिषासुरमर्दिनी, गुंसाई सम्प्रदाय के महात्मा गुंसाईजी, रावल मल्लीनाथ, पाबूजी राठौड़, लोकदेवता बाबा रामदेव, हड़बूजी, मेहाजी, गोगाजी, ब्रह्माजी, सूर्यदेव, रामचंद्र, कृष्ण, महादेव, जलंधरनाथजी, गणेश



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