जोधपुर।
विदेशों पर मूंग की निर्भरता को समाप्त करने के लिए केन्द्र सरकार की ओर से मूंग सहित अन्य दलहनों के उत्पादन पर जोर दिया जा रहा है। कृषि विश्वविद्यालय भी आयातित दालों पर निर्भरता कम करने में भूमिका निभा रहा है और दलहन के उन्नत बीज पैदा कर किसानों को उपलब्ध करा रहा है। विश्वविद्यालय की ओर से किसानों को उन्नत बीज, उन्नत तकनीक आदि उपलब्ध करवाने पर कार्य किया जा रहा है। देश में सबसे ज्यादा मंूग का उत्पादन राजस्थान में होता है। प्रदेश के कुल दलहन (मूंग-मोठ) उत्पादन में कुल क्षेत्रफ ल के करीब 70 प्रतिशत क्षेत्र में मारवाड़ की हिस्सेदारी है। पिछले वर्ष में देश में मूंग उत्पादन पर जोर दिया गया, परिणामस्वरूप आयात में कुछ कमी आई। हालांकि इस वर्ष मौसम व कोरोना की वजह से उत्पादन प्रभावित हुआ और करीब 750 क्विंटल बीज पैदा किए गए।
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7 केन्द्रों पर तैयार हो रहे बीज
मण्डोर स्थित कृषि अनुसंधान केन्द्र के अलावा विश्वविद्यालय के अधीन संचालित हो रहे नागौर, जालोर, सुमेरपुर, सिरोही, मोलासर व समदड़ी के केन्द्रों पर मूंग के उन्नत बीज तैयार किए जा रहे है। इन केन्द्रों पर करीब 300 हैक्टेयर क्षेत्र में बीज तैयार किए जा रहे है। जहां वैज्ञानिकों की देखरेख में उन्नत बीज तैयार कर मॉनिटरिंग की जा रही है।
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नागौर-जालोर हब के रूप में विकसित
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने दलहन उत्पादन व उपयोगिता को देखते हुए कृषि विश्वविद्यालय के नागौर व जालोर केन्द्र को दलहन बीज उत्पादन हब के रूप में विकसित किए गए है।
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प्रमुख केन्द्रों पर बीज उत्पादन
केन्द्र--- बीज उत्पाद क्विं में
कृषि विज्ञान केन्द्र-- 450
सुमेरपुर-- 100
नागौर----90
जालोर--- 55
कृषि अनुसंधान केन्द्र जोधपुर-- 33
समदड़ी--- 15
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इस बार कोरोना व मौसम की वजह दलहन के उन्नत बीज उत्पादन प्रभावित हुआ है। विवि के सात केन्द्रों पर करीब 750 क्विंटल उन्नत बीज तैयार किए गए है।
डॉ. एमएल मेहरिया, वैज्ञानिक व जनसंपर्क अधिकारी
कृषि विश्वविद्यालय
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