कोरोना ने खूब डराया, फिर भी हौंसले के बल पाई सफलताएं

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जोधपुर. कोरोना का खौफ साल 2020 में जोधपुर पर छाया रहा। फिर भी हमारे हौंसले बुलंद रहे। जोधपुर के राष्ट्रीय स्तरीय संस्थानों ने अपने रिसर्च के बूते व अनेक कार्यों से शहर का नाम रोशन किया। शहरवासियों ने इस बीच ‘अपनों’ को खोने का दर्द भी खूब झेला। अस्पतालों में अव्यवस्थाओं का आलम का मुद्दा भी राज्य स्तर पर छाया रहा। साल 2020 की हमें क्या-क्या सौगातें मिली और क्या दर्द जोधपुरवासियों ने झेला।

22 मार्च को मिला पहला संक्रमित और 8 अप्रेल को हुई पहली मौत
जोधपुर में 22 मार्च के दिन जोधपुर में पहला कोरोना संक्रमित मरीज मिला था। ये दिन शहर के लिए बड़ा खौफनाक था। वहीं 8 अप्रेल को हुई पहली मौत और दूसरे दिन संक्रमित वृद्ध की पॉजिटिव होने की पुष्टि ने पूरे शहर को सहमा दिया था।

नई पीढ़ी ने देखा कर्फ्यू
शहर में मार्च माह से शुरू हुआ लॉकडाउन 31 मई को खत्म हुआ। जोधपुर में कोरोना के बढ़ते प्रकोप के कारण थाना अनुसार कर्फ्यू लगाया गया। जोधपुर में कफ्र्यू का नजारा नई पीढ़ी ने पहली बार देखा।

२१ नवंबर को जोधपुर में हो गए ५० हजार जने संक्रमित
जोधपुर में कोरोना ने ८ माह में ५० हजार जनों को संक्रमित कर दिया। जोधपुर में ५० हजार कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा २१ नवंबर को पूरा हुआ।

बैड व ऑक्सीजन की हुई कमी, प्रशासन ने देखे इंतजाम
जोधपुर में सितंबर माह में कोरोना ने बड़ी तेजी से रफ्तार पकड़ी। सितंबर में एक दिन में ५ सौ मरीज संक्रमित आने लगे और नवंबर में आंकड़ा १ हजार पार कर गया। अस्पतालों में एकबारगी बैड की कमी हो गई और मरीजों के लिए ऑक्सीजन कम पडऩे लग गए। पत्रिका में प्रकाशित खबरों के बाद कलक्टर व संभागीय आयुक्त ने अस्पतालों में राउंड किए। ऑक्सीजन के पर्याप्त इंतजाम हुए।

क़ोरोना से निपटने के लिए आगे आया आइआइटी
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) जोधपुर ने कोरोना से निपटने और उससे बचने के लिए कई शोध किए। मास्क सहित अन्य पदार्थ सेनेटाइज करने के लिए फोटोकेटेलिक ऑक्सीडेशन स्टरलाइेशन सिस्टम बनाया। प्रो रामप्रकाश सीरी ने अल्ट्रा वॉयलेट आधारित कनवेयर बेल्ट सेनेटाइजेशन सिस्टम तैयार किया। प्रो सुरजीत घोष की कोरोना पर रिसर्च की बोस्टन रिपोर्ट प्रकाशित हुई, जिसमें बताया गया कि भारतीयों का प्रतिरक्षा तंत्र अमरीकियों से मजबूत होने के कारण कोविड-१९ वायरस का उन पर प्रभाव कम है।

सुपर कम्प्यूटर से लेकर नैनोमैटेरियल की उपलब्धि
आइआइटी जोधपुर में देश का पहला डीजीएस-ए१०० सुपर कम्प्यूटर लगा, जिससे आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को बढ़ावा मिलेगा। आइआइटी के प्रो राकेश शर्मा ने लोहे को जंग से बचाने के लिए एक नैनोमेटेरियल विकसित किया जो लड़ाकू विमानों को राडार से भी बचाता है। इलेक्ट्रिक विभाग ने कागज से ट्रांजिस्टर और जिलेटिन युक्त बायोडिग्रेडेबल ट्रांजिस्टर बनाया। आइआइटी के प्रो. महेश कुमार ने ताजा मछली की पहचान के लिए फार्मेटिन ट्रेस करने वाला सेंसर विकसित किया।

बेनू एस्टेरॉइड में जोधपुर के वैज्ञानिक
- धरती से २० करोड़ किलोमीटर दूर बेनू एस्टेरॉइड पर नासा ने अपना ओसिरिस-रेक्स यान उताकर वहां मिट्टी के नमूने लिए। नमूने जांच करने वाली टीम में जोधपुर के वैज्ञानिक डॉ नरेंद्र भंडारी भी शामिल है।

ये भी उपलब्धि
काजरी के निदेशक डॉ ओपी यादव को भारतीय विज्ञान अकादमी की प्रतिष्ठित फैलोशिप से नवाजा गया।



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