जोधपुर. मौसम का मिजाज बदल गया है और कोरोनाकाल भी चल रहा है। ऐसे में बुजुर्गों और दिल के मरीजों को अपना विशेष ख्याल रखना चाहिए। दरअसल सर्दियों के मौसम में अस्पताल में भर्ती होने की दर व हार्ट अटैक मरीजों की संख्या भी बढ़ जाती है। एमडीएम अस्पताल के इमरजेंसी में भी हार्ट अटैक पीडि़त रोगियों की संख्या में इन दिनों इजाफा हो रखा है।
ठंड में बढ़ जाते हैं हार्ट फेलियर के चांस
चिकित्सकों के अनुसार ठंड में कई बार हमारे शरीर को आवश्यकता के अनुसार ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की जरूरतों को पूरा करने के हिसाब से बॉडी में पर्याप्त मात्रा में खून पंप नहीं हो पाता है, जिस वजह से जिनका दिल पहले से कमजोर है, उन मरीजों को सांस की तकलीफ हो जाती है। ठंड के मौसम में तापमान कम हो जाता है। इस कारण ब्लड वेसल्स सिकुड़ जाते हैं। जिससे शरीर में खून का संचार अवरोधित होता है। इससे हृदय तक ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। हृदय को शरीर में खून और ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए अतिरिक्त श्रम करना पड़ता है। ठंड के मौसम,धुंध और प्रदूषक जमीन के और करीब आकर बैठ जाते हैं। जिससे छाती में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है और सांस लेने में परेशानी पैदा हो जाती है। ऐसे में हार्ट के मरीजों को इससे परेशानी होती है। ठंड में पसीना कम निकलता है और यही वजह है कि फ ेफ ड़ो में पानी जमा हो जाता है जिस वजह से भी हार्ट फेल हो जाता है।
ध्यान रखने की बात
सूरज की रोशनी से मिलने वाला विटामिन-डी, हृदय में स्कार टिशूज को बनने से रोकता है, जिससे हार्ट अटैक के बाद, हार्ट फेल में बचाव होता है। सर्दियों के मौसम में सही मात्रा में धूप नहीं मिलने से, विटामिन-डी के स्तर को कम कर देता है,जिससे हार्ट फेल का खतरा बढ़ जाता है। आपको दिल की बीमारी है तो अपनी सेहत का खास ख्याल रखें और हर दिन एक्सरसाइज करें। अगर सुबह में ठंडी बहुत है तो घर पर ही रहकर व्यायाम करें, नहीं तो शाम के समय का उपयोग करें। रक्तचाप की जांच कराते रहें।
इनका कहना है...
हार्ट रोगियों में बढ़ोतरी हुई है। हालांकि कोरोना के कारण आउटडोर कम है। फिर भी इमरजेंसी में मरीजों की तादाद बढ़ी हुई है। हार्ट पेशेंट और बुजुर्गों को ठंड में विशेष ध्यान रखना चाहिए। घर में व्यायाम करें और धूप का सेवन करें।
- डॉ. रोहित माथुर, एसोसिएट प्रोफेसर, कार्डियोलॉजी विभाग, डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज
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