बिलाड़ा (जोधपुर). राजसीड द्वारा प्रमाणित जिस बीज को किसान उन्नत किस्म व अच्छी पैदावर देने के साथ साथ अच्छे भाव दिलाने वाला मानकर अपने खेतों मे बुआई करते हैं, उसी बीज से उगी फसल रोग की चपेट में आ जाए और फसल बर्बाद हो जाए तो किसान की स्थिति के बारे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
क्षेत्र में किसान हजारों बीघा में कपास की विभिन्न किस्मों की बुवाई करते हैं। राजसीड द्वारा मान्यता प्राप्त एसीएच -33 दो बीजी द्वितीय बीटी कपास को किसान अपनी पहली पंसद मानने लगे हैं। इसी के चलते वर्ष 2020 के जून-जुलाई में सैकड़ों किसानों ने इस बीज की बुआई की लेकिन कथित रूप से कम्पनी ने अपने डीलरों के माध्यम से नकली बीज की बिक्री कर दी जिससे दो माह गुजरने के बाद फसल बर्बाद हो गई।
किसानों को हुआ भारी नुकसान
किसानों ने अपने दुकानदारों एवं कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक के कार्यालय को शिकायत भेजी। इस कार्यालय से स्वयं उपनिदेशक कृषि ओपी पांडे, कृषि अनुसंधान केन्द्र के वैज्ञानिक जेआर वर्मा, राहुल भारद्वाज,शालिनी पांडे और क्षेत्रीय अधिकारी रामकरण बागवान ने किसानों के खेतों जाकर अवलोकर किया जहां बीटी कपास सूख चुकी थी।
वैज्ञानिकों ने माना बीज रोगग्रस्त था
किसानों व स्थानीय डीलर्स ने संयुक्त निदेशक के अलावा मुख्यमंत्री कार्यालय में भी कंपनी द्वारा खराब बीज देने की शिकायत की, जिसे सीएमओ ने गंभीरता से लेते हुए वैज्ञानिकों के दल को जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उपनिदेशक एवं वैज्ञानिकों ने खेतों में पहुंच फसल का अवलोकन कर उन्होंने जो सरकार को रिपोर्ट दी उसमें स्पष्ट लिखा कि कपास फसल की किस्म एसीएच -33 दो बीजी द्वितीय बीटी जिसकी उत्पादक कंपनी अजीत सीड्स औरंगाबाद के बुआई के बाद उगे पौधो में अकारिक असमानता, रोग जैसे की बेक्टीयल ब्लाइट पैराबिल्ट, उक्ठा, पत्ती धब्बारोग कीट जैसे की सफेद मक्खी, हरा तेला व ग्रे विविल पाए गए। इस किस्म की बुआई करने वाले किसानों को उपज मे सत्तर प्रतिशत तक नुकसान हुआ है।
किसान अब न्यायालय के द्वार
कृषि विभाग एवं मुख्य मंत्री कार्यालय में शिकायत दर्ज कराने वाले जेतिवास के किसान मदनसिंह शेखावत, अणदाराम, भवरलाल, धन्नाराम सीरवी, बाबुलाल, एवं पांचाराम ने बताया कि विभाग द्वारा सरकार को अपनी रिपोर्ट देने तीन माह बाद तक भी न तो किसानों को मुआवजा दिलाया गया है और न ही बीज उत्पादक कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया है। ऐसे में मजबूरन किसान न्यायालय की शरण लेंगे।
इनका कहना है
क्षेत्र के जिन किसानों ने अजीत सीड्स कम्पनी के बीटी कपास के बीज की बुआई की वह कपास पर फूल आने से पहले ही सूख गई। कृषि वैज्ञानिक एवं अधिकारियों के दल ने खेतों में अवलोकन के दौरान पाया कि बीटी कपास 60 से 70 फीसदी खत्म हो चुकी थी।
-रामकरण बागवान, क्षेत्रीय कृषि अधिकारी, बिलाड़ा
मैंने स्थानीय दुकानदार से अजीत सीड्स कम्पनी प्राइवेट लिमिटेड का बीटी कपास का बीज खरीदा, जिसकी खेत में बुआई करने के बाद खड़ी कपास सूख गई जिससे उसे और दर्जनों अन्य किसानों को लाखों रुपए का नुकसान हुआ है।
-मदन सिंह शेखावत, किसान, जेतिवास
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