जोधपुर. कोरोना संक्रमण की जद में हरेक घर में अधिकांश लोग नहीं आए। कई लोगों तक संक्रमण का प्रसार नहीं हुआ। इस बात का खुलासा एम्स जोधपुर व स्वास्थ्य विभाग के साथ संक्रमित निकले होम आइसोलेशन वाले लोगों के घरों में किए गए शोध में हुआ है। ये शोध यूके डव मेडिकल प्रेस में प्रकाशित हुआ है। इस शोध में कोविड संक्रमित मरीजों के घर में परिवार सदस्यों की संख्या व उनमें गणना को रेखांकित किया गया। इस शोध में एम्स से डॉ. सिद्धार्ता दत्ता, डॉ. रिंपल जीतकौर, डॉ. पंकज भारद्वाज, डॉ. जयकरण चारण, डॉ. तनुज कंचन, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के उपनिदेशक डॉ. सुनील बिष्ट, लूणी बीसीएमएओ व चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं में डिप्टी सीएमएचओ डॉ. मोहनदान देथा, डॉ. प्रवीण शर्मा का सहयोग रहा। वहीं एम्स निदेशक डॉ. संजीव मिश्रा का विशेष सहयोग रहा।
यूं किया शोध
चिकित्सकों ने इस अध्ययन में परिवार में कोविड पॉजिटिव मामलों की संख्या, उनके जनसांख्यिकी विवरणों के साथ, संक्रमित के घर में कमरों की संख्या के बारे जानकारियां एकत्रित की। एकल सदस्य वाले 19 परिवारों को क्वॉरंटाइन रखा गया था। कुल 2126 सदस्य वाले 350 परिवारों में से 480 ( 22.25 प्रतिशत) कोविड पॉजिटिव थे। उनमें से अधिकांश पुरुष (68.9 प्रतिशत ) थे। ज्यादातर मामले में आयु वर्ग 19 से 49 वर्ष ( 67.33 प्रतिशत) में थे। परिवार में चार सदस्यों में से जो संक्रमित हो गया, ऐसे लोग पुरुष ज्यादा थे और कामकाजी मिले। कई होम क्वॉरंटाइन संक्रमित के परिवारों से शोधकर्ताओं ने फोन पर जानकारी ली।
परिवार में सभी को कोरोना ने समान रूप से प्रभावित नहीं किया
शोध में स्पष्ट हुआ कि सभी परिवार के सदस्यों को कोरोना ने समान रूप से प्रभावित नहीं किया। ज्यादातर परिवारों में एक चौथाई ही संक्रमित हुए। घरों में महिलाएं और बच्चों में कोरोना कम हुआ।
होम आइसोलेशन बेस्ट रहा
पूरे निष्कर्ष में ये भी निकला कि कोरोना का प्रसार परिवारों में ज्यादा नहीं हुआ, क्योंकि घरों में सख्ती से कोविड की पालना की। परिवारों ने विशेष ध्यान दिया। लूणी बीसीएमएओ डॉ. मोहनदान देथा ने कहा कि इसमें विशेष रूप से जिला कलक्टर की भागीदारी महत्वपूर्ण रही। इस कारण से संक्रमण अधिक नहीं फैला।
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