Jodhpur Nagar Nigam Election तय करेंगे शेखावत व वैभव का सियासी कद

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जोधपुर। जोधपुर नगर निगम के चुनाव में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत Gajendra Shekhawat व उनके सामने कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव हारे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र वैभव Vaibhav Gehlot की प्रतिष्ठा दाव पर है। मुख्यमंत्री के गृह नगर के दोनों निगमों उत्तर व दक्षिण के चुनाव परिणाम शेखावत व वैभव का सियासी कद तय करने वाले साबित होंगे।
शेखावत भाजपा में एक नए पॉवर सेंटर के रूप में उभर रहे हैं। जोधपुर से लगातार दूसरी बार सांसद निर्वाचित होने वाले शेखावत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी #PM Modi व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह #Amit Shahके नजदीक है। नतीजन उन्हें इस बार काबिना मंत्री #Cabinet Minister बनाया गया। इसके बाद राजस्थान की राजनीति में शेखावत तेजी से नए पॉवर सेंटर के रूप में सामने आए हैं। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के रूप में उनका नाम चलने के बाद वे पीछे नहीं मुड़े और लगातार खुद को प्रदेश की भाजपाई राजनीति में स्थापित करने में जुटे हैं। जोधपुर नगर निगम चुनाव की कमान भी भाजपा की ओर से उन्होंने ही सम्भाले रखी। प्रत्याशी चयन से लेकर प्रत्याशियों के प्रचार तक में शेखावत अग्रणी रहे हैं। मुख्यमंत्री गहलोत के प्रति उनका आक्रामक रवैया उन्हें एक नए नेता के रूप में प्रतिष्ठापित कर रहा है। ऐसे में निकाय चुनाव में यदि भाजपा को जीत हासित होती है तो निश्चित रूप से शेखावत का कद और बढ़ेगा।
सम्भाले रखी कमान
टिकट वितरण को लेकर हालांकि उनके प्रति नाराजगी के सुर भी सामने आए हैं, लेकिन शेखावत पूरे चुनाव अभियान के दौरान पूर्व महापौर घनश्याम ओझा, पूर्व उप महापौर देवेंद्र सालेचा, प्रदेश उपाध्यक्ष प्रसन्नचंद मेहता व भाजपा शहर जिलाध्यक्ष देवेंद्र जोशी समेत अपनी टीम के साथ जुटे रहे। पार्टी की अपेक्षा के अनुरूप परिणाम निश्चित रूप से शेखावत को और मजबूत करेंगे, लेकिन निगम दक्षिण में जहां भाजपा को ज्यादा उम्मीद थी, वहां कम मतदान प्रतिशत ने संशय खड़ा कर दिया है। ऐसे में यदि परिणामं अपेक्षा के अनुरूप नहीं आते हैं तो शेखावत विरोधियों को हावी होने का मौका मिल सकता है।

आखिर में आए मैदान में
दूसरी तरफ, कांग्रेस पूरे निकाय चुनाव में कहीं भी आक्रामक नजर नहीं आई। टिकट वितरण को लेकर ऐसा बवाल मचा कि पार्टी ने सम्भवतः पहली बार अपने प्रत्याशी ही घोषित नहीं किए और जिन्हें प्रत्याशी बनाना था, उनके सिम्बल सीधे निर्वाचन अधिकारी कार्यालय में ही जमा करवाए गए। इसके बाद प्रभारी मंत्री महेंद्र चौधरी समेत बड़े नेताओं की गैर मौजूदगी चुनाव प्रचार को भी धार नहीं दे सकी। आखिरी दिनों में वैभव गहलोत जोधपुर आए और प्रचार अभियान की कमान सम्भाली। वैभव हालांकि चुनाव से पहले से ही जोधपुर की कांग्रेस राजनीति में सक्रिय होकर स्थापित होने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन पहली बार उन्हें निगम चुनाव में स्वतंत्र रूप से एक्सपोज होने का मौका मिला है। मुख्यमंत्री गहलोत के इन चुनाव में कहीं नजर नहीं आने से भी उन्हें खुद को साबित करने का अवसर मिला है। यदि निगम चुनाव में कांग्रेस को आशातीत सफलता मिल जाती है तो वैभव का सियासी कद निश्चित रूप से बढ़ जाएगा।
फिलवक्त, सभी की नजरें चुनाव नतीजों के साथ साथ भाजपा की राजनीति में शेखावत व कांग्रेस की राजनीति में वैभव के सियासी कद पर पड़ने वाले असर पर भी टिकी हैं।



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