जोधपुर. क्षीर सागर में सोए भगवान विष्णु जागने के दिवस देव प्रबोधिनी एकादशी को शहर में मांगलिक आयोजन की धूम रहेगी। कार्तिक सुद ग्यारस से वैष्णव मंदिरों व घरों में भी तुलसी विवाह की धूम रहेगी। करीब पांच माह के अंतराल के बाद शुरू हो रहे शुभ कार्य में इस बार कोरोना की सख्त गाइडलाइन के कारण घरातियों-बारातियों के लिए सावों का रंग फीका हो गया है। कार्तिक पूर्णिमा तक शुभ मुहूर्त होने के कारण लगातार आगामी पांच दिन तक जोधपुर सहित समूचे मारवाड़ के सभी गांव कस्बों में वैवाहिक आयोजनों की धूम रहेगी। अकेले देव प्रबोधिनी एकादशी को समूचे मारवाड़ में करीब एक हजार जोड़े परिणय सूत्र में बंधेंगे। बुधवार से पांच दिवसीय भीष्म पंचक व्रत भी आरंभ हो जाएंगे। पं. मोहनलाल गर्ग ने बताया कि देव प्रबोधिनी एकादशी को किसी प्रकार के ग्रहबल की आवश्यकता नहीं होने के कारण सभी तरह के मांगलिक कार्य के लिए शुभ है। उन्होंने बताया कि आषाढ़ शुक्ल पक्ष एकादशी को देवशयन जबकि कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी को देवों का जागरण होता है। उस समय विष्णु भगवान क्षीर सागर में निद्रा त्याग करते हैं । उसके बाद से ही पृथ्वी पर मंगलकार्य प्रारंभ होते हैं। उन्होंने बताया कि आगामी 11 दिसंबर तक विवाह के शुभ मुहूर्त हैं। उसके बाद 25 अप्रैल तक विवाह लग्न खरमास व गुरु शुक्र दोष के कारण विवाह के मुहूर्त नहीं हैं ।
अब प्रथम 'न्यौता प्रशासन को
विवाह समारोह निर्विघ्न होने के लिए पहला निमंत्रण प्रथम पूज्य विनायक को दिए जाने की परम्परा रही है। लेकिन कोरोना गाइडलाइन के चलते अब पहला निमंत्रण प्रशासन को दिया जा रहा है। मांगलिक आयोजनों की अनुमति के लिए मंगलवार को जिला कलक्ट्रेट में वर-वधु पक्ष के लोगों की कतारें लगी रही।
प्रीतिभोज के समय में बदलाव
शहर में बुधवार को देवप्रबोधिनी एकादशी यानी देवउठनी ग्यारस पर अधिकांश शादियां तो मैरिज गार्डन और होटलों में ही है । कोरोना के मामले बढऩे से जिला प्रशासन की नई गाइडलाइन के चलते अब विवाह समारोह में तब्दीलियां की
जा रही है । शहर के कई विवाह समारोह में अब रिसेप्शन के समय में बदलाव किया गया है । विवाह समारोह के प्रीति भोज को दो पारियों में कर दिया गया है ताकि गाइडलाइन की पालना की जा सके । सुबह और शाम दो हिस्सों में प्रीतिभोज के लिए अलग अलग मेहमानों की सूचियां तैयार की गई है।
प्रशासन के लिए भी चुनौति
इस बार विवाह मुहूर्त कम होने से अप्रैल - मई के लॉकडाउन के दौरान टाली गई शादियां भी इन्हीं दिनों में हो रही हैं ।
देवउठनी ग्यारस के अबूझ मुहूर्त की मान्यता सर्वाधिक होने से विवाह आयोजन ज्यादा होंगे । कोरोना के चलते होने वाले विवाह आयोजन लेकर प्रशासन के माथे चिंता की लकीर है ।
कब कितना श्रेष्ठ सावा
पंडित मोहन लाल गर्ग ने बताया कि गर्ग पंचाग के अनुसार वर्ष 2020 में देवप्रबोधिनी एकादशी 25 नवम्बर से शुभ विवाह मुहूर्त शुरू होकर 11 दिसंबर तक है।
25 नवंबर को 7 रेखी सावा
27 नवंबर को 7 रेखी
30 नवंबर को 8 रेखी
1-दिसम्बर को 8 रेखी
6 दिसम्बर 9 रेखी
7 दिसम्बर 9 रेखी
9 दिसम्बर 8 रेखी
10 दिसम्बर चित्रा नक्षत्र 10 रेखी
11 दिसम्बर 10 रेखी
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